दैव भाषा संस्कृत में केंद्रीय मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने व्यक्त किए अपने विचार


केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने शनिवार को दिल्ली के श्री लाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ में आयोजित संस्कृत भारती के तीन दिवसीय आवासीय प्रांत संस्कृत सम्मेलन को संबोधित किया।



नई दिल्ली ( 29 दिसम्बर) : केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने शनिवार को दिल्ली के श्री लाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ में आयोजित संस्कृत भारती के तीन दिवसीय आवासीय प्रांत संस्कृत सम्मेलन को संबोधित किया।

इस सम्मेलन में डॉ हर्ष वर्धन ने दैव भाषा संस्कृत में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संस्कृत सम्मेलन में शामिल होकर मुझे अपने पुराने दिन याद आ गए जब मैंने संस्कृत शिविर में संस्कृत बोलना सीखा था। उन्होंने कहा कि संस्कृत, दुनिया की सबसे पुरानी और समृद्ध भाषा है और इसे जन-जन पहुंचाने की जरुरत है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमलोग सौभाग्यशाली हैं कि आज हमें नरेंद मोदी जैसे योग्य, कर्मठ, प्रामाणिक और दूरदृष्टि वाले प्रधानमंत्री मिले हैं। वे दिन रात मेहनत कर भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में तेजी से अग्रसर हैं।

इस मौके पर मौजूद प्रबुद्ध जनों को संबोधित करते हुए उन्होंने सभी से अपने दैनिक जीवन में ग्रीन गुड डीड्स को अपनाने के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने बताया कि उनका मंत्रालय और वे स्वयं इस दिशा में लोगों को प्रेरित कर रहे हैं ताकि धरती को बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों को ऐसा पर्यावरण दे सके जैसा कि हमारे पूर्वजों ने हमे दिया है।

इस मौके पर डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत ने विज्ञान व प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति हासिल की है। आज हमलोग सुनामी अर्ली वार्निग सिस्टम में दुनिया में नंबर एक स्थान पर और नैनों टेक्नोलॉजी में दुनिया में तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने कहा कि भारत का वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) सरकारी फंड पर चलने वाले दुनिया के 1209 से संस्थानों की सूची में 9वें पायदान पर है।

इस मौके पर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कामत, आईआईएमसी के महानिदेशक के जी सुरेश, हिमाचल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री, श्री लाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के प्रोफेसर केदार परोहा, बिहारी लाल जी, जेनएनयू के डॉ ब्रजेश पांडेय, प्रो. हरीराम मिश्र एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।