Union Minister Dr Harsh Vardhan launches high-tech CRV, Sagar Tara


कोलकाता में जलयान सीआरवी ‘सागर तारा’ का जलावतरण


विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ हर्ष वर्धन की उपस्थिति में सोमवार 24 दिसंबर को कोलकाता में टीटागढ़ शिपयार्ड में नए तटीय अनुसंधान जलयान सीआरवी ‘सागर तारा’ का जलावतरण किया गया। इस नये जलयान के जलावतरण से भारत एक नई समुद्री ताकत के युग में प्रवेश कर गया है।



कोलकाता (24 दिसंबर) : विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ हर्ष वर्धन की उपस्थिति में सोमवार 24 दिसंबर को कोलकाता में टीटागढ़ शिपयार्ड में नए तटीय अनुसंधान जलयान सीआरवी ‘सागर तारा’ का जलावतरण किया गया। इस नये जलयान के जलावतरण से भारत एक नई समुद्री ताकत के युग में प्रवेश कर गया है।

Kolkata, 24 December 2018: Union Minister for Science and Technology, Earth Sciences, Forest, Environment and Climate Change Dr Harsh Vardhan today launched coastal research vessel ‘Sagar Tara’, built by built by Titagarh Wagons Ltd for the National Institute of Ocean Technology.

इस अवसर पर डॉ हर्ष वर्धन उपस्थित जनों को संबोधित करुते हुए बताया कि मार्च-अप्रैल 2019 में ऐसे ही एक अन्य तटीय अनुसंधान जलयान सागर अन्वेषिका का जलावतरण किए जाने की संभावना है। इसके बाद भारत सरकार के लगभग 60 अनुसंधान संस्थानों के अनेक जनपयोगी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए समुद्री वैज्ञानिक डाटा उपलब्धि में व्यापक वृद्धि हो जाएगी।

Speaking on the occasion, Dr Harsh Vardhan said a similar coastal research vessel will be launched during March-April, 2019. Following this, the Union Minister said, marine data will become available to nearly 60 research institutes of the Central government in the country.

इस समय भारत के समुद्री क्षेत्र में सागर कन्या, संपदा, सागर निधि, सागर मंजुषा और सागर पूर्वी वैज्ञानिक जलयान मौजूद हैं। सागर तारा के जलावतरण के बाद भारत के अनुसंधान जलयानों की संख्या में वृद्धि के साथ ही भारत की समुद्री अनुसंधान क्षमता विश्व के अग्रणी देशों के समान हो जाएगी।

India posseses several research vessels which include Sagar Kanya, Sampada, Sagar Nidhi, Sagar Manjusha and Sagar Purvi. However, now with the launch of Sagar Tara, not only number of research vessels have increased but also India’s capability in blue economy has received a boost.

सीआरवी ‘सागर तारा’ को भारत में अनन्य आर्थिक क्षेत्र में समुद्र विज्ञान और वायुमंडलीय आंकड़ों की गणना की भूमिका के साथ उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों और नवीनतम नौचालन उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है। इस जलयान का उपयोग पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए संपूर्ण भारतीय तट सहित उथला जल प्रचालनों, सतही जल गुणवता निगरानीद्ध विभिन्न अंतर्जलीय उपकरणों के उथला जल परीक्षण प्रौद्योगिकी प्रदर्शन सुनामी पूर्व चेतावनी प्रणालियां, गहरी समुद्री प्रौद्योगिकी विकास समुद्र से औषधिएं अन्यय आर्थिक जोन के बाथीमीट्री सर्वेक्षण जहाजों और तटीय क्षेत्रों आदि के सूचकांक आदि के लिए किया जाएगा।

Speaking on the occasion, Dr Harsh Vardhan said such vessels will be extremely helpful in India's research in marine field. He said this vessel is by far one of the most remarkable developments in the history of India's coastal research. Sagar Tara is equipped with the advanced scientific equipments and latest navigational equipment with a role of measuring oceanographic and atmospheric data within the Exclusive Economic Zone of India, CRV Sagar Tara will be utilized for shallow water operations [Surface Water Quality Monitoring (SWQM), shallow water testing of various underwater components, technology demonstration, Tsunami early warning systems, Deep sea technology development, Drugs from sea, Bathymetry survey of Exclusive Economic Zone [EEZ], Environmental indexing of ships and coastal zones and others.

केंद्रीय मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि सागर तारा जलयान की लंबाई 43 मीटर और ड्राफ्ट 2.5 मीटर है। इसमें 8 वैज्ञानिक और 12 क्रू सदस्य 15 दिनों के लए समुद्र की भीतर हर सकते हैं। टीटागढ़ शिपयार्ड कोलकाता को भारत सरकार की मेक इन इंडिया नीती के तहत 99.5 करोड़ रुपए खर्च करके और अधिक सुसज्जित किया जा रहा है ताकि भारत तथा विश्व को इन अनुसंधानों से लाभ मिल सके

The Union Minister also said Sagar Ratna which is 43 metre long and 2.5 metre in draft can remain deep under sea for 15 days with eight scientists and twelve crew members Built at the cost of 99.5 crore, the research vessel has been developed under ‘Make in India’ initiative by Titagardh Shipyard.