India to host COP 13 next year: Dr Harsh Vardhan


अगले वर्ष COP 13 की मेजबानी करने वाला भारत: डॉ हर्षवर्धन



Union Minister for Science and Technology, Earth Sciences, Forest, Environment and Climate Change, Dr Harsh Vardhan today launched dedicated Asiatic lion conservation project, a first of its kind of initiative in India and informed the media about hosting of the 13thConference of Parties(COP) of Conservation of Migratory Species (CMS) from 15-22 February 2020 at Gandhinagar in Gujarat.



New Delhi, 8 February, 2019: Union Minister for Science and Technology, Earth Sciences, Forest, Environment and Climate Change, Dr Harsh Vardhan today launched dedicated Asiatic lion conservation project, a first of its kind of initiative in India and informed the media about hosting of the 13th Conference of Parties(COP) of Conservation of Migratory Species (CMS) from 15-22 February 2020 at Gandhinagar in Gujarat.

नई दिल्ली, 8 फरवरी, 2019: केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज भारत में अपनी तरह की पहली पहल समर्पित एशियाई शेर संरक्षण परियोजना शुरू की। इस बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात के गांधीनगर में 15-22 फरवरी 2020 से प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (Conservation of Migratory Species) के 13 वें सम्मेलन (COP) की भारत मेजबानी करेगा।

With regard to conservation of Asiatic lion, he said, the big cat which has been identified by the Ministry of Environment, Forest and Climate Change as part of 21 critically endangered species, is currently found in Gujarat’s Gir forest. It has been listed in Schedule -1 of the 1972 Wildlife (Protection) Act.

एशियाई शेर के संरक्षण के संबंध में उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 21 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों के हिस्से के रूप में पहचान की गई। वर्तमान में शेर गुजरात के गिर जंगल में पाए जाते हैं और इसे 1972 के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची -1 में सूचीबद्ध किया गया है।

Talking about the project, he said he wants to see it becomes a model initiave on wildlife protection so that it could be emulated by others too. The project envisages a scientific management prescription with involvement of communities in coordination with multi-sectoral agencies.

परियोजना के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो इसे वन्यजीव संरक्षण पर एक मॉडल के रूप में देखना चाहते है ताकि दूसरों को प्रेरणा दे सके। परियोजना में बहु-क्षेत्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में समुदायों की भागीदारी के साथ एक वैज्ञानिक प्रबंधन पर्चे की परिकल्पना की गई है।

Besides, better management of habitat, disease control and veterinary care of lion, the project will ensure that it remains beneficial in furthering the conservationof Asiatic lions and their habitat in the country. On this occasion, the Union Minister also said that it is a modest three-year project for which a total budget of Rs 98 cr has been allocated. An amount of Rs 17.03 cr has been released during first year of the project.

इसके अलावा इस परियोजना के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यकलापों में शेर के प्रवास का बेहतर प्रबंधन, रोग नियंत्रण और शेर के समग्र संरक्षण हेतु पशु चिकित्सीय देखरेख को शामिल किया जाएगा। मंत्रालय द्वारा इस परियोजना के प्रथम वर्ष के दौरान किए जाने वाले कार्यकलापों के क्रियान्वयन हेतु 17.03 करोड़ रूपए की धनराशि जारी की जा रही है।

He said modern information and communication technology (ICT) has been proposed for the conservation, protection and development of the greater Gir region.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गिर क्षेत्र के संरक्षण, संरक्षण और विकास के लिए आधुनिक सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के लिए प्रस्तावित किया गया है।

On the 13th COP of CMS, he said representatives from 129 countries and eminent conservationists and NGOs working in the field of wildlife protection are expected to attend the event. He also said the hosting of event would give India an opportunity to showcase its conservation initiatives for wildlife species. For this purpose, logo and mascot, Gibi along with website for the event have also been released.

Conservation of Migratory Species के 13 वें COP पर उन्होंने कहा कि 129 देशों के प्रतिनिधियों और प्रख्यात संरक्षणवादियों और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के इस कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोजन की मेजबानी भारत को वन्यजीव प्रजातियों के लिए अपनी संरक्षण पहल दिखाने का अवसर देगी। इस उद्देश्य के लिए वेबसाइट के साथ LOGO और शुभंकर, Gibi भी जारी किया गया है।