Union Minister for Health and Family Welfare, Science and Technology and Earth Sciences, Dr Harsh Vardhan today paid heartfelt tribute to the founder of Jan Sangh, Dr Syama Prasad Mookerjee Ji on the martyrdom day.


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज दिल्ली के कोटला ग्राउंड स्थित शहीदी पार्क में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर अन्य गण्मान्य लोग मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने भाजपा मुख्यालय जाकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।



As a proud nationalist, Dr Mookerjee Ji sacrificed his life for the unity and integrity of the country. He was against granting of special status to Kashmir. He launched a nationwide campaign against the policy of having two emblems, two PMs and two constitutions in one country and, also the imposition of a permit system in Jammu and Kashmir.



डॉ मुखर्जी ने अपना सर्वस्व जीवन राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए समर्पित कर दिया। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के लिए सिर्फ राष्ट्र सर्वोपरि था। इसलिए उन्होंने सत्ता का त्याग कर देश की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान के विरूद्ध डॉ मुखर्जी ने स्वतंत्र भारत का पहला राष्ट्रवादी आंदोलन छेड़ा था।



The permit system envisaged bar on the entry of Indian citizens to the state. It was abolished on April 1, 1959 by the Jammu and Kashmir government following a nationwide stir. Even as such abolition took place almost six years after Dr Syama Prasad Mookerjee Ji’s mysterious death during his house arrest in Srinagar on June 23, 1953, credit for launching a sustained movement against it went to this beloved founder of Jan Sangh.

परिमट प्रणाली के तहत देश के बाकी नागरिकों को जम्मू कश्मीर में प्रवेश पर बैन था। देशव्यापी आंदोलन के बाद एक अप्रैल 1959 को इसे समाप्त कर दिया गया। आज यदि हम जम्मू-कश्मीर में बिना परिमट के जा सकते हैं तो उसके पीछे डॉ मुखर्जी जी का बलिदान है हालांकि डॉ मुखर्जी के बलिदान के 6 वर्ष बाद परमिट प्रणाली को हटाया जा सका। इसके लिए उन्होंने देश में सतत् आंदोलन शुरू किया। 23 जून 1953 को श्रीनगर में घर में नजरबंद के दौरान रहस्यमयी ढंग से डॉ मुखर्जी की मृत्यु हो गई थी।

In fact, his supreme sacrifice for the unity and integrity of India still inspires crores of Indians who are rather committed to seeing their country rise from strength to strength in days to come under the leadership of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi Ji.

भारत की एकता और अखंडता के लिए डॉ मुखर्जी का सर्वोच्च बलिदान आज भी करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी इसे आगे बढ़ाते हुए देश को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Needless to say, Dr Syama Prasad Mookerjee Ji was an epitome of determination, courage and conviction in Indian politics. The whole nation is indebted to the pioneering role he assayed for strong and united India—which is now heading towards becoming a major voice of the world.

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी, भारतीय राजनीति में दृढ़संकल्प, साहस और दृढ़विश्वास के प्रतीक हैं। पूरा देश उनके इस योगदान के लिए सदैव ऋणी रहेगा। ऐसे अभिजात देशभक्त के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में कोटि- कोटि वंदन