नई दिल्ली, 16 फरवरी, 2020: केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण,विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन आज निःस्वार्थ भाव से काम वाले एक संगठन स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसायटी के तत्वाधान में नईदिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम 'देवभूमि: चिकित्सा सेवा के 7 वर्ष' में सम्मिलित हुए।



इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी व श्री सुरेश सोनी जी के अलावा उत्तराखंड की गवर्नर श्रीमती बेबीरानी मौर्य जी और हंस फाउंडेशन की संस्थापक परम पूज्य माता मंगला जी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसायटी देवभूमि उत्तराखंड में नि:स्वार्थ भाव से 8 अस्पताल चला रही है।

इस अवसर पर उपस्थित निःस्वार्थ जनसेवकों को संबोधित करते हुए डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में देश के प्रतिष्ठित डॉक्टरों द्वारा निस्वार्थ भाव से अपनी सेवा देना प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि एक ओर हमने ‘You Quote We Pay’ की नीति के तहत राज्य सरकारों को अनुमति दी है कि इस सिद्धांत को अपनाकर वे डॉक्टरों की भर्ती कर सकते हैं। इसके बावजूद कई राज्यों में डॉक्टर नहीं मिलते लेकिन स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसायटी में कुछ तो खास है, तभी तो बड़े-बड़े डॉक्टर अपना वित्तीय नुकसान करके भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी सेवा देते हैं और यह समाज के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है।

डॉ हर्ष वर्धन ने 1994 में दिल्ली में अपने स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल को स्मरण करते हुए कहा कि दिल्ली में जेल की तत्कालीन महानिरीक्षक श्रीमती किरण बेदी जी ने उन्हें स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते गणतंत्र दिवस पर तिहाड़ जेल के एक कार्यक्रम में चीफ गेस्ट बनने का निमंत्रण दिया। डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि निमंत्रण को स्वीकारते हुए कहा कि उन्होंने मुख्य अतिथि की तरह नहीं बल्कि एक डॉक्टर के रूप में वहां जाकर कैदियों के ENT मेडिकल चेकअप करने की बात कही, क्यूंकि स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद वे कई महीनों से अपनी प्रैक्टिस नही कर पाए थे, इसीलिए मरीजों से मिलने की तड़प दूर करने और सेवा भाव के नाते उन्होंने तिहाड़ जेल में मुख्य अतिथि नहीं बल्कि एक डॉक्टर के रूप में जाना बेहतर समझा।