10 नवम्बर 2019 - संस्कृतभारती के विश्व सम्मेलन के दूसरे दिन आज विशेष सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन, स्वामी अवधेशानंद जी महराज व हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति रही।



विश्व सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि देश के पूर्व राष्ट्रपति श्री के आर नारायणन जी ने भी कहा था कि संस्कृत राष्ट्रीय एकता का प्रतीक व सार है तथा एशिया को विश्व से जोड़ने का सूत्र है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि संस्कृतभारती के इस पहले विश्व सम्मेलन में आये भारत समेत 21 देशों के 4000 प्रतिनिधि देश के 1 करोड़ लोगों को संस्कृत सम्भाषण सिखा चुके हैं और इस समय भी 1 लाख लोगों को विदेश में संस्कृत सिखा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमें बड़ी खुशी हुई यह जानकर कि इन 37 सालों में संस्कृतभारती ने 'Speak Sanskrit in 10 days' जैसे लाखों कैंप भारत में लगाए हैं। संस्कृत के गौरव को देश और दुनिया में पुनर्स्थापित करने वाले कार्यकर्ताओं को डॉ हर्षवर्धन ने हृदय की गहराइयों से नमन् करता हूँ। संस्कृतभारती के विश्व सम्मेलन के दूसरे दिन पूजनीय स्वामी अवधेशानंद जी ने कहा कि संस्कृत देव भाषा है जिसने वेद और शास्त्र दिए हैं। इसने ये बताया वो परम पुरुष सर्वत्र व सर्व व्यापक है।आज धरती पर अनेक देश ऐसे हैं जहाँ संस्कृत भाषा बोली जा रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा यथार्थ का बोध कराती है। एक काल था, जब देश में युवक युवतियों के मन में पाश्चात्य सभ्यता का आकर्षण था अब उतना नही है।

संस्कृतभारती के विश्व सम्मेलन में उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू जी ने कहा कि भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा संस्कृत भाषा में है। चाणक्य की राजनीति, भास्कराचार्य का गणित, आयुर्वेद, योग, आदि विषय संस्कृत में विकसित हुए। इसी ज्ञान विज्ञान के बल पर हमारे पुरखों ने देश को समृद्ध किया था| उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण, जल नियोजन व आरोग्य की बड़ी समस्या है। दुनिया के अनेक देशों में उसके लिए लोग #संस्कृत का अध्ययन करते है। इन विषयों में अनुसंधान भी करते हैं। हमारे शिक्षा संस्थानो को भी ऐसे अनुसंधान करने चाहिए। उपराष्ट्रपति जी ने एक लेख का जिक्र करते हुए बताया कि मशहूर इतिहासकार Will Durant ने 1931 में कहा था कि संस्कृत सभी यूरोपियन भाषाओं की जननी है।

उपराष्ट्रपति जी ने बताया कि उन्हें एक बार अज़रबैजान के अग्निमंदिर में जाने का अवसर मिला था जो भारत और अज़रबैजान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विनिमय का उदाहरण है। अठारहवीं सदी के इस स्मारक की दीवारों पर देवनागरी व गुरमुखी लिपि में अभिलेख लिखे हैं।