02 नवंबर 2019: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने संस्कृतभारती द्वारा आगामी 9 से 11 नवंबर को दिल्ली के छतरपुर मंदिर परिसर में आयोजित किए जा रहे प्रथम विश्व संस्कृत सम्मेलन पर विस्तृत जानकारी देने के लिए आज संस्कृत भारती के महामन्त्री श्रीश देव पुजारी जी के साथ अपने आवास पर एक पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व में संस्कृत को दृढ़ता प्रदान करने के लिए संस्कृत भारती संगठन, संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार कर रही है।



उन्होंने बताया कि विश्व संस्कृत सम्मेलन में अमेरिका, इंग्लैंड, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, रूस, न्यूजीलैंड और अरब देशों से सहित 18 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे और परिणामजनक चर्चा करेंगे । पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि देश के 583 जिलों में संस्कृत भारती कार्य कर रही है और इसके 111 पूर्णकालिक कार्यकर्ता और संगठन से जुड़े हजारों अन्य लोग स्वयंसेवक भाव से देववाणी संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने में लगे हैं। संस्कृतभारती पिछले चार दशक से दुनिया में संस्कृत भाषा के संरक्षण व संवर्द्धन में जुटी हुई है। दुनिया में संस्कृत के प्रति बढ़ती उत्सुकता को देखकर संस्कृत भारती ने विश्व संस्कृत सम्मेलन आयोजित करने की पहल की है। सम्मेलन में संस्कृत भाषा के प्रसार के लिए तीन वर्षो की रणनीति बनाई जाएगी। विश्व संस्कृत सम्मेलन में उन्हीं लोगों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है, जो संस्कृत भाषा बोलना जानते हैं।

उन्होंने बताया कि विश्व संस्कृत सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी जी का उद्बबोधन होगा। 10 नवंबर को सायं साढ़े चार बजे से सार्वजनिक सत्र होगा, जिसमें संस्कृत से प्रेम रखने वाले आम जन भी भाग ले सकते हैं। इस सत्र की अध्यक्षता महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी करेंगे। विश्व संस्कृत सम्मेलन में 'संस्कृत में विज्ञान', संस्कृत डॉक्यूमेंट्री, पांडुलिपियां, संस्कृत शिलालेखों, कवि श्रेष्ठ कालिदास के जीवन जैसे विषयों पर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा। पत्रकार वार्ता में एक सवाल के जवाब में मैंने कहा कि संस्कृत के प्रचार-प्रसार को सिर्फ कमर्शियल नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। संस्कृत सीखना आत्मीय भाव का प्रतीक है। विश्व संस्कृत सम्मेलन के दौरान नौ नवंबर को संस्कृत के लोकनृत्यों और 10 नवंबर को शास्त्रीय नृत्य में सोनल मानसिंह की प्रस्तुति होगी। इस दौरान प्रतिदिन सायं साढ़े सात से साढ़े आठ बजे के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

डा हर्ष वर्धन ने बताया कि इस सम्मेलन में केवल संस्कृतभाषी एवं दायित्ववान कार्यकर्ता प्रवेश कर सकेंगे। वे सभी अपने व्यय से दिल्ली आयेंगे और यहां भी शुल्क देंगे ताकि संस्कृत सेवा के कार्य को गति दी जा सके। डा. हर्षवर्धन ने कहा कि मुझे गर्व होगा यदि अधिक से अधिक व्यक्ति संस्कृत को मातृभाषा के रूप में पल्लवित, पोषित करेंगे।

संवाददाता सम्मेलन को संस्कृत भारती के अखिल भारतीय मंत्री श्रीष देवपुजारी ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने बताया कि 17 देशों-कनाडा, इंग्लैंड, मारिशस, केन्या, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, सिंगापुर, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया, रूस, नेपाल और न्यूजीलैण्ड संस्कृत भारती पूरी ऊर्जा और शक्ति के साथ काम कर रही है। हमारा लक्ष्य विश्व के कोने-कोने तक संस्कृत भाषा की पताका को शिखर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि संस्कृत भारती की वेबसाइट samskritabharati.in, विश्व सम्मेलन की वेबसाइट sbvishwa.in एवं Twitter Handle और Instagram ID- @sb_bhartiya, फेसबुक पेज-Samskritabharati पर किसी भी समय नवीनतम जानकारी ली जा सकती है। इस अवसर पर अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख शिरीष भेडसगांवकर भी उपस्थित थे