नई दिल्ली, 07-05-2020: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज आयुष मंत्री श्रीपाद नायक जी के साथ आज नई दिल्ली के निर्माण भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संजीवनी ऐप और दो आयुष आधारित अध्ययनों का शुभारंभ किया।



डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि आयुष मंत्रालय ने अपने इस कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग को मान्यता दी है और उसका पालन भी किया है।उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की संपदा की ताकत का वर्णन वेदों और शास्त्रों में भली भांति किया गया है। दुनिया ये सब जानते हुए भी इसे सम्मान नहीं देती क्यूंकि अभी तक किसी ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करके इसे विश्व के सामने प्रस्तुत नहीं किया।

डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि दिल्ली सरकार में जब वे स्वास्थ्य मंत्री थे। उस समय 'दिल्ली रिसर्च सेंटर फॉर मॉडर्नाइज्ड प्रमोशन ऑफ आयुर्वेद' बनाया गया था। उसमें एम्स दिल्ली में फॉर्मेकॉलोजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ जी एन शर्मा जी ने इसमें काफी काम भी किया था लेकिन 1998 के बाद आई सरकारों ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया। उन्होंने 'हिंदू सुपीरियॉरिटी' नामक एक पुस्तक का जिक्र किया जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में भारत की महानता के बारे में विदेशी लोगों ने समय-समय पर क्या कहा है, ये लिखा है। यह ऐसी पुस्तक है जिसमें हर विषय को समाहित किया गया है। इसी पुस्तक का बाद में फारसी, अरबी और यूरोपीय भाषाओं में अनुवाद भी किया गया है।

भारत की प्राचीन पद्दतियों के कितने उन्नत सिद्धांत थे, ये इस पुस्तक से पता चलता है। इसलिए कोविड से लड़ने में आयुर्वेद से भी हमें सहायता मिलने की पूरा विश्वास है। डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि आयुर्वेद की जो अंदरूनी ताकत है उसका वास्तविक इस्तेमाल जो देश, दुनिया के लिए होना चाहिए वो शायद हो नहीं पाया है। देश, दुनिया के सामने आयुर्वेद की श्रेष्ठता को हम आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से सिद्ध करके प्रस्तुत करेंगे।इसके लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसने प्रोफिलैक्टिक अध्ययनों के लिए नैदानिक अनुसंधान प्रोटोकॉल तैयार किए हैं और कोविड-19 पॉजिटिव मामलों में रिपोर्ट तैयार की है।

इसने चार अलग-अलग आविष्कारों का अध्ययन करने के लिए देश भर के विभिन्न संगठनों के उच्च प्रतिनिधियों की गहन समीक्षा के माध्यम से अश्वगंधा, यष्टिमधु, गुडुची, पिप्पली और एक पॉली हर्बल फॉर्मूला (आयुष -64) पर काम किया जाएगा।ये अध्ययन कोविड-19 महामारी के दौरान बढ़े हुए जोखिम के साथ स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं में SARS-COV-2 के खिलाफ प्रोफिलैक्सिस के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और अश्वगंधा के प्रभाव के बीच तुलना करेगा।इसके मुख्य उद्देश्यों में कोविड-19 के लिए आयुष हस्तक्षेपों की निवारक क्षमता का आकलन और उच्च जोखिम वाली आबादी में जीवन की गुणवत्ता में सुधार का आकलन करना शामिल है।