17 सितंबर 2019: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी पोषण अभियान के तहत आज स्वास्थ्य मंत्रालय में Poshan Maah 2019 कार्यक्रम के साथ-साथ एनीमिया और डायरिया कैंप का शुभारंभ किया। इस मौके पर VHSND Guidelines भी जारी की । पोषण अभियान का मकसद देश को कुपोषण से मुक्त करना और हर पुरुष, महिला व बच्चों को कुपोषण से बचाने के प्रति जागरूक करना है। यह अभियान कई मंत्रालयों की मिली- जुली पहल से मनाया जा रहा है, जिसकी अगुवाई महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कर रहा है जबकि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय अभियान का मुख्य भागीदार है। इस दौरान उन्होंने डायरिया हराओ अभियान के लिए भी मार्गदर्शिका जारी की ।



इस अवसर पर डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि सर्वविदित है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत करवाई थी जिसका लक्ष्य गर्भवती महिलाओं, माताओं और बच्चों को पर्याप्त पोषण और संपूर्ण विकास सुनिश्चित करवाना है । इस अभियान का मकसद बच्चों में शारीरिक विकास की कमी, कुपोषण और जन्म के समय बच्चों के कम वजन जैसी समस्याओं के स्तर में 2 फीसदी और खून की कमी जैसे मामलों में 3 फीसदी प्रति वर्ष की कमी लाना है । उन्होंने कहा कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत जांच-उपचार-चर्चा रणनीति अहम हैं। समाज व जनता के बीच एनीमिया को लेकर जागरूकता फैलाई जानी है। पोषण मेला 2019 के दौरान देश भर में ऐसे जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं जिसमें पोषण अभियान से जुड़े संदेशों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए हमने VHSND प्लेटफॉर्म बनाया है। इसके तहत कुछ गाइडलाइंस बनाए गए हैं ।

एनीमिया या खून की कमी बच्चे के विकास के बेहद अहम पहलुओं को क्षति पहुंचाता है साथ ही उनमें बीमारियों की आशंका बढ़ा देता है। एनीमिया वयस्कों में कामकाज की क्षमता और उत्पादकता भी घटाता है । ताजा आंकड़े बताते हैं कि 53% महिलाएं अपनी प्रजनन क्षमता की 15 से 49 साल के बीच की उम्र में एनीमिक पाई गई हैं । 50 % गर्भवती महिलाओं और बच्चे खून की कमी से ग्रस्त हैं ।

उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के साथ ही पोषण मेला 2019 मनाया जा रहा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से एनीमिया और डायरिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए देश भर में कैंप लगाए जा रहे हैं । लोगों से अपील है कि इन बीमारियों के प्रति सजग रहें । उन्होंने कहा कि देश में ऐसे जनजागरण की जरूरत है जिसके तहत लोगों को एनीमिया की जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाए। खून की कमी होने पर आयरन और फॉलिक एसिड की गोलियां ली जाएं । गर्भवती महिलाओं और बच्चों समेत हम सभी को आयरन तत्वों से भरपूर आहार लेने की आदत डालनी होगी । डायरिया से अपने बच्चों को बचाने के लिए साफ पानी और स्वच्छता के साथ खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोने की आदतों को अपनाना बहुत जरूरी है। पांच साल के कम आयु के तकरीबन 50 फीसदी बच्चे दस्त आने पर ORS का प्रयोग करते हैं । 5 साल से कम के बच्चों की संख्या का महज पांचवा हिस्सा ही ऐसा है जिन्होंने दस्त होने पर 14 दिनों तक जिंक का सेवन किया । ओआरएस और जिंक diarrhoea होने पर लें । इनके बनाने का तरीका और सेवन की जानकारी शिविरों में दी जा रही है ।