27 अगस्त, 2019: केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज देहरादून में प्लास्टिक से डीजल बनाने वाला एक प्लांट राष्ट्र को समर्पित किया। एक टन क्षमता वाला यह प्लांट CSIR-Indian Institute of Petroleum के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि है। प्लांट के उद्घाटन के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, गेल के निदेशक श्री डीवी शास्त्री, सीएसआईआर-आईआईपी के कार्यकारी निदेशक डॉ अंजन रे समेत कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।



सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गेल के सहयोग से स्थापित इस प्लांट की दोहन क्षमता प्रतिदिन एक टन प्लास्टिक की है। यह प्लांट 1 टन बेकार प्लास्टिक से रोज 800 लीटर डीजल तैयार करेगा, जिसका इस्तेमाल फिलहाल सेना व पुलिस के वाहनों में होगा। प्लांट के उद्घाटन के बाद डॉ हर्ष वर्धन ने CSIR-IIP, देहरादून के परिसर में पहले से चल रहे बायो जेट फ्यूल प्लांट व पीएनजी बर्नर प्लांट का भी दौरा किया। Bio-Jet Plant में जैट्रोफा के बीज व हाइड्रोजन के मिश्रण से बायोजेट फ्यूल तैयार किया जा रहा है। जैव ईंधन से न सिर्फ तेल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि उड़ान खर्च में भी 20% तक कमी आएगी। जबकि पीएनजी बर्नर प्लांट में CSIR-IIP के वैज्ञानिकों ने ऐसा PNG बर्नर ईजाद किया है जिससे 25 से 30% तक गैस की बचत होती है। इसके निर्माण के लिए कई कंपनियों के साथ क़रार किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की देश से Single Use Plastic खत्म करने की मुहिम में बेकार प्लास्टिक से डीजल बनाने का प्रायोगिक प्लांट अहम भूमिका अदा करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले से प्लास्टिक के खिलाफ जन आंदोलन के आह्वान किया था और प्लास्टिक से डीजल बनाने वाला यह प्लांट मोदी जी के सपने को पूरा करने की दिशा में एक पहल है। Single Use Plastic को खत्म करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है और इसे लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का यह आह्वान काफी प्रेरणादायक है।

उन्होंने कहा कि आज भारत कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने के साथ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए उचित प्रबंधन पर लगातार कार्य कर रहा है, प्लास्टिक इन दोनों समस्याओं के प्रमुख तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। हम प्लास्टिक बनाने के लिए कच्चे तेल या पेट्रो केमिकल्स का आयात करते हैं, जिन्हें पर्यावरण में उपयोग करने के बाद डंप किया जाता है, जो कि जानवरों, पौधों और मानव के लिए नुकसानदायक है। इस अवसर CSIR-IIP के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई एक ऐसी कार की भी सवारी की जिससे न तो धुआं निकलता है न ही कोई शोर। CSIRIIP के वैज्ञानिकों ने पेट्रोल-डीजल से चलने वाली पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक कार में बदलने में सफलता पाई है।