नई दिल्ली, 11-05-2020: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन आज 22 वें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।



वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन हमारे लिए ऐतिहासिक है। इस दिवस का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य बताते हुए उन्होंने कहा कि 11 मई, 1998 को भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक करके एक बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की थी। इसके अलावा, पहले स्वदेशी विमान "हंसा -3" का परीक्षण इसी दिन बैंगलोर में किया गया था। भारत ने उसी दिन त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि आज देश और दुनिया बेहद संकट के दौर से गुजर रहे हैं, COVID- 19 महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालाँकि, वर्तमान संकट में, COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में प्रौद्योगिकी सबसे आगे है। जैसा कि हम सभी इस अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं, कोविड -19 के खिलाफ भारत की लड़ाई बड़ी मजबूती और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रही है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने भारत सरकार ने अभी तक कोविड19 पर बहुत प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया है । उन्होंने कहा कि हमारे माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, भारत ने इस संकट से निपटने और प्रबंधन में सकारात्मक सोच का परिचय दिया है। प्रधान मंत्री जी ने इस चुनौतीपूर्ण समय का उपयोग राष्ट्रीय संकट के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक पुनरुत्थान के अवसर के रूप में करने के लिए, "मेक इन इंडिया" पहल को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर बनने के लिए एक स्पष्ट आह्वान किया है। इस संबंध में, भारत सरकार डीएसटी, डीबीटी, सीएसआईआर, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और टीडीबी जैसी संस्थाओं के सहयोग से कोविड19 के खिलाफ लड़ाई में भारतीयों के स्वास्थ्य और वैज्ञानिक समुदाय की सुविधा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी की बात आती है, तो एक राष्ट्र के रूप में भारत हमेशा किसी भी चुनौती को पूरा करने के लिए तैयार है। हमेशा की तरह, हमने कई मोर्चों पर तेज गति और प्रतिबद्धता के साथ कार्रवाई की है।

भारत सरकार ने कोविड19 संबंधित प्रौद्योगिकी क्षमताओं को स्टार्ट-अप, शिक्षा, अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला और उद्योग में मैप करने के लिए 'कोविड19 टास्क फोर्स' की स्थापना की है।

इस टास्क फोर्स ने डायग्नोस्टिक्स, ड्रग्स, वेंटिलेटर, प्रोटेक्शन गियर, डिसइंफेक्टिंग सिस्टम आदि के क्षेत्रों में 500 से अधिक संस्थाओं की पहचान की है।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि हमारी सरकार ने 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम को सख्ती से सक्रिय किया है, जिसके तहत देश के विभिन्न अनुसंधान एवं विकास संस्थानों ने फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस सामग्री के निर्माण में कोविड19 परीक्षण किट, मास्क, अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), तथा रोगियों के लिए वेंटिलेटर (श्वास उपकरण) आदि तैयार किए हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि इस वर्ष के प्रौद्योगिकी दिवस के विषय को लेकर मुझे प्रसन्नता है। विषय RE-START यानि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से अर्थव्यवस्था को पुनः स्थापित करें ।

हमें नए मंत्र के रूप में आत्मनिर्भरता का उपयोग करके एक मजबूत रिकवरी के लिए तैयार करना होगा और तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए नए अवसरों की तलाश करनी होगी।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि इस वर्ष प्रौद्योगिकी दिवस सभी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे देश के वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने प्रौद्योगिकी नेतृत्व प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक और तकनीकी विकास को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय प्रयासों को गति दी है।

कोविड19 महामारी के कारण सबसे बड़े स्वास्थ्य रक्षा सेवा संकट से निपटने के लिए नवीन तकनीकों का समर्थन करने के लिए प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड(टीडीबी) सबसे आगे निकल गया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR), अपने न्यू मिलेनियम इंडियन टेक्नोलॉजी लीडरशिप इनिशिएटिव (NMITLI) के तहत, प्रभावी रोकथाम हस्तक्षेपों के लिए उद्योगों से प्रस्ताव मांग रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक संभावित टीके के लिए अपनी खोज में दुनिया भर के संसाधनों और वैज्ञानिकों को शामिल किया है। डब्ल्यूएचओ में भारत भी एक बड़ी भूमिका निभा रहा है।

महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब इतने सारे देशों में इतने सारे विशेषज्ञों ने एक ही विषय पर और इतनी तत्परता के साथ काम किया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने यह भी विश्वास दिलाया कि हर संकट की तरह, यह भी बीत जाएगा और हमेशा की तरह, हम फिर उभरेंगे और मजबूत बनेंगे, लेकिन कोविड19 हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ जाएगा। महामारी के बाद, हमारी सामाजिक संरचना, वैश्विक और आर्थिक सहयोग में भी बदलाव होगा।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि कोविड19 महामारी, हालांकि प्रभाव में असाधारण है, समूचा देश इसका पूरी तरह से और एकजुट रूप से सामना ही नहीं बल्कि सभी संसाधनों के साथ इसका मुकाबला कर रहा है। देश के प्रत्येक नागरिक ने संकट के इस क्षण में कर्तव्य के सामान्य आह्वान से परे जाकर इस प्रयास में योगदान दिया है।