नई दिल्ली,28 फरवरी, 2020: केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में सम्मिलित हुए। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी के दिन ‘Raman Effect’ की खोज के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक सर सी.वी. रामन ने ‘Raman Effect’ की खोज की घोषणा की थी, जिसके लिए वर्ष 1930 में उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला था। इस बार राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की मुख्य विषयवस्तु ‘विज्ञान में महिलाएं’ हैं।



महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने इस समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर भारत सरकार के प्रधान विज्ञान सलाहकार प्रोफेसर विजय राघवन जी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री आशुतोष शर्मा जी, जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ रेणु स्वरूप जी और सी एस आई आर के महानिदेशक डॉक्टर शेखर मांडे जी भी उपस्थित थे।

वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की विषयवस्तु के रूप में ‘विज्ञान में महिलाएं’ विषय को चुना है,ये बहुत प्रसन्नता की बात है। भारत के संदर्भ में ‘विज्ञान में महिलाएं’ सिर्फ एक विषय नहीं है, बल्कि यह एक सचेत विकासात्मक प्रतिमान है। भारतीय महिलाओं ने भी पिछले 100 वर्षों की अवधि में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में एक बड़ी उपस्थिति दर्ज करायी है।

डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग -DST और जैव प्रौद्योगिकी विभाग में महिला वैज्ञानिकों को आकर्षित करने और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए विशेष योजनाएं हैं।

DST की एक विशेष योजना 'किरण' (नॉलेज इंवेस्टमेंट इन रिसर्च एडवांस्मेंट थ्रू नर्चरिंग) का उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में लैंगिक समानता लाना और महिला वैज्ञानिकों की गतिशीलता और प्रशिक्षण से संबंधित मुद्दों का समाधान करना है।

उन्होंने कहा कि DST का CURIE-‘महिला विश्वविद्यालयों में नवाचार और उत्कृष्टता के लिए विश्वविद्यालय अनुसंधान का एकीकरण कार्यक्रम’ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए महिला विश्वविद्यालयों को अनुसंधान अनुदान प्रदान करता है।

डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि शीर्ष संस्थानों में इंजीनियरिंग और गणित जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों में युवा महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘विज्ञान ज्योति’ नामक अभिनव कार्यक्रम की उत्कृष्ट सफलता के बाद DST इसे अब एक संपूर्ण कार्यक्रम के रूप में शुरू करने की योजना बना रहा है।

DST द्वारा युवा शोधकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई कई नई योजनाओं का जिक्र करते हुए डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि नेशनल पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप, प्रारंभिक करियर अनुसंधान पुरस्कार, ओवरसीज डॉक्टरल एवं पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप और रिसर्च एक्सीलेंस आदि के लिए शिक्षक एसोसिएट्स जैसी योजनाएं इनमें शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि युवा छात्रों को नवोन्मेषी रूप से सोचने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, एक नया कार्यक्रम MANAK - मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन्स ऐंड नॉलेज, वर्ष 2018 में शुरू किया गया है। इसमें छात्रों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को भी शामिल किया जाना है।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि ICMR देश के विभिन्न हिस्सों में वायरल रिसर्च ऐंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज (VRDLs), मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट्स (MRU) और 25 मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट्स (MRHRU) के जरिये स्वास्थ्य शोध क्षमता को मजबूत करने के लिए ठोस प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि मौसम और जलवायु के क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए हमारी सटीक पूर्वानुमान प्रणाली वैश्विक मानदंड स्थापित कर रही है।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि नये भारत में नई चुनौतियां उभर रही हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने और समस्याओं के समाधान के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित समाधान के लिए राष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होने का आह्वान करता हूं।