01 अक्टूबर 2019: राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्त दान दिवस के अवसर पर आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने दिल्ली के एम्स के मुख्य ब्लड बैंक में आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उनके साथ एम्स के निदेशक, चिकित्सक व स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद थे। इस रक्तदान शिविर में, डॉ हर्ष वर्धन ने भी रक्तदान किया। इसके बाद राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अगले पड़ाव पर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्माण भवन स्थित मुख्यालय में एक रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उनके साथ स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे, NACO व कई अन्य समाजसेवी संस्थाओं के लोग मौजूद थे।



रक्तदान शिविर में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि वे हर वर्ष रक्तदान करते हैं और उन्होंने सभी से अपील की कि वर्ष में कम से कम एक बार रक्तदान करने का प्रण लें, रक्तदान करने से स्वयं तो स्वस्थ रहते ही हैं, किसी अन्य की भी जिंदगी को बचाते हैं। उन्होंने कहा- रक्तदान दिवस की प्रासंगिकता तभी है जब हम इसे एक बड़े जन आंदोलन के रूप में विकसित करें और अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाएं। अगर आप साल में चार बार भी रक्त दान करते हैं तो स्वास्थ्य की दृष्टि से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है बल्कि स्वास्थ्य लाभ ही होता है|

उन्होंने कहा कि अपने जन्मदिन पर माता-पिता का आशीर्वाद लेकर रक्तदान करने की आदत डालें। 1971 की लड़ाई के दौरान स्कूल में पढ़ते हुए मैंने रक्तदान किया था और तब से लेकर आज तक हर साल रक्तदान करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं किसी रक्तदान शिविर का उद्घाटन सिर्फ फीता काटने के नहीं बल्कि स्वयं रक्तदान करके करता हूं। चिकित्सा विज्ञान बताता है कि जो लोग नियमित तौर पर रक्तदान करते हैं उनको बीमारियां होने की संभावनाएं कम होती हैं। रक्तदान करने से जहां एक तरफ आप किसी व्यक्ति की जान बचाकर उसके चेहरे में खुशियां लाते हैं वहीं इससे आपके स्वास्थ्य की भी बेहतरी होती है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों से अपील करते हुए कहा कि पहले स्वयं रक्तदान करने की आदत डालें ताकि दूसरे लोग इससे प्रेरणा लें और रक्तदान के लिए जागरूक हों। देश में सुरक्षित रक्त की काफी कमी है और उस कमी को हम सब मिलकर दूर कर सकते हैं।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि स्‍वामी विवेकानंद जी कहते थे कि ‘जीवन में वही लोग जीते हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं’। रक्तदान को अपने जीवन में उतारें और नियमित रूप से रक्तदान करें। इस अवसर पर उन्होंने शिविर में रक्तदान कर रहे लोगों से भी मुलाकात की और उनका उत्साह वर्धन किया।