केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने कहा है कि संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 ऐतिहासिक, अग्रणी और परिवर्तनकारी है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में एनडीए सरकार द्वारा चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा सुधार है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम आने वाले वर्षों में मील का पत्थर साबित होगा।



Minister for Health & Family Welfare, Science & Technology, and Earth Sciences, Dr Harsh Vardhan said that the National Medical Commission Act 2019 passed by both Houses of Parliament is historic and path-breaking. It is a huge and visionary reform in the medical education sector by the NDA Government under the leadership of our visionary Prime Minister Shri Narendra Modiji and will prove to be a milestone in the years to come.



डॉ हर्ष वर्धन आज नई दिल्ली में एनएमसी अधिनियम 2019 के बारे में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा मैं प्रधानमंत्री के प्रति आभारी हूं जिनके मजबूत नेतृत्व में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 पारित हुआ। डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि यह अधिनियम प्रगतिशील है जो विद्यार्थियों पर बोझ कम करेगा, चिकित्सा क्षेत्र में शुचिता सुनिश्चित करेगा, चिकित्सा शिक्षा लागत में कमी लाएगा, प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा, भारत में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने में सहायक होगा तथा गुणवत्ता सम्पन्न शिक्षा और लोगों को गुणवत्ता सम्पन्न स्वास्थ्य देखभाल सुविधा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तनकारी सुधार है और मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में एनएमसी के अतंर्गत देश में चिकित्सा शिक्षा शिखर पर पहुंचेगी।

Dr Harsh Vardhan was addressing a press conference on the NMC Act 2019 at Delhi. He said that he is extremely grateful to the Hon’ble Prime Minister under whose strong leadership the National Medical Commission Act has finally seen the light of the day. He stated that the NMC Act is progressive legislation which will reduce the burden on students, ensure probity in medical education, bring down costs of medical education, simplify procedures, help to enhance the number of medical seats in India, ensure quality education, and provide wider access to people for quality healthcare. He said it is a game-changing reform of transformational nature. He said he is sure that under the NMC, medical education in the country will attain its zenith in the years to come.

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा है देश में MBBS की कुल 80 हजार सीटें हैं जिनमें से 40 हजार सीटें सरकारी कॉलेजों में हैं। बाकी बची निजी कॉलेजों की 40 हजार सीटों में से 20 हजार सीटों की फीस केंद्र सरकार रेगुलेट करेगी जबकि 20 हजार सीटों को कैपिंग के साथ रेगुलेट करने का अधिकार राज्यों को होगा। उन्होंने कहा कि भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस कानून से Quacks को बढ़ावा मिलेगा लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। Quacks के खिलाफ MCI एक हजार रुपए का पेनाल्टी लगाती थी लेकिन हमने कानून को कड़ा करते हुए एक साल की सजा और 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया है।

Dr Harsh Vardhan said there are 80000 MBBS seats in the country out of which 40000 are alloted to government colleges. Rest 40000 seats in the private colleges, 20000 are regulated by the central government, whereas 20000 can be regulated by the state with capping. He said false rumours, fears have been created that this provision will give a fillip to quackery in the country. Nothing can be farther from the truth. MCI used to put a penalty of Rs 1000 against quackery whereas, on the contrary, the punishment for quackery has been enhanced to up to one-year imprisonment and up to Rs 5 lakhs fine.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम विद्यार्थियों के अनुकूल है। इसमें देशभर के चिकित्सा संस्थानों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए समान प्रवेश परीक्षा (नीट) और समान काउंसलिंग प्रक्रिया की व्यवस्था है।

He said that the National Medical Commission Act is a student-friendly initiative. It also provides for a common entrance examination for MBBS (NEET) along with common counselling for all medical institutions in the country.