नई दिल्ली, 24-06-2020: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन आज परम श्रद्धेय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस अवसर पर भाजपा अध्यक्ष श्री जे पी नड्डा जी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी जी की दृष्टि को आत्मसात करते हुए पार्टी को आगे कैसे मजबूत किया जा सकता है, इसके चिंतन और अवलोकन करने के लिए हम सभी एकत्रित हुए हैं।



श्री नड्डा जी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ मुखर्जी बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। वे मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति नियुक्त हुए। उन्होंने ये मुकाम किसी के सहयोग से नहीं, बल्कि अपनी विद्वता और कर्म के आधार पर प्राप्त किया। मंत्री रहकर मंत्री पद से उन्होंने इस्तीफा भी दिया। कोई पद उनका लक्ष्य नहीं था और जब कोई पद उनके लक्ष्य में अड़ंगा बना तो उन्होंने वो पद त्याग दिया।

वर्चुअल मीटिंग के माध्यम से बलिदान दिवस मनाने के लिए नड्डा जी ने भाजपा दिल्ली प्रदेश इकाई को बधाई देते हुए कहा कि संक्रमण कितना भी हो, हम नहीं रुकेंगे, हम नहीं डिगेंगे। हम रहेंगे अपने पथ पर और चलते रहेंगे, चलते रहेंगे।

देश आजाद होने के पश्चात असम, पंजाब का बहुत बड़ा हिस्सा जाने वाला था लेकिन डॉ. मुखर्जी जी ने बहुत बड़ा आंदोलन करके बंगाल, पंजाब और असम को बचाने का काम किया। जब जनसंघ की स्थापना की गई तो डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। डॉ. मुखर्जी जी ने शुरुआत से जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने की बात का विरोध किया। लेकिन नेहरू जी और शेख अब्दुल्ला के बीच तब खिचड़ी पक रही थी तब अस्थाई प्रावधानों के साथ अनुच्छेद 370 लगाया गया और नेहरु जी इसका समर्थन कर रहे थे।

श्री नड्डा जी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे का नारा दिया था। खंडित भारत का, अखंडता के लिए लड़ते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का पहला बलिदान था। मुखर्जी जी व्यक्ति नहीं बल्कि विचार थें।

5 अगस्त 2019 को मोदी जी की इच्छाशक्ति और अमित शाह जी की रणनीति ने मुखर्जी जी के विचारों और बलिदान की लड़ाई को अंजाम देते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया।