06 सितंबर 2019 : केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य व परिवार कल्याण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने एम्स जाकर वहां इलाज करा रहे जग्गा व बलिया से मुलाकात की । बच्चों से मिलने के बाद खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि AIIMS दिल्ली में सर्जरी व 2 साल के इलाज के बाद जग्गा व बलिया के सिर अब अलग हो चुके हैं । बच्चों की जिंदगी आसान बनाने के लिए उन्होंने डॉ. दीपक गुप्ता व एम्स की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि देश में सिर से जुड़े बच्चों का ये पहला मामला है जब उन्हें अलग करने की सफल सर्जरी की गई।



कल रात जग्गा व बलिया से मिलने के बाद आज पत्रकारों से बात करते हुए डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि यह एक भावुक क्षण है और इस वक्त मुझे बहुत आनंद और एम्स के डाक्टरों पर गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि मैं चाहता था कि जब ये बच्चे अस्पताल से डिस्चार्ज हों तो मैं भी उनसे आकर मिलूं और उनके साथ कुछ वक्त बिताऊं और कल रात वो ऐतिहासिक क्षण आया जब मुझे इन बच्चों और उनके माता-पिता से मिलने का अवसर मिला। डॉ हर्ष वर्धन ने इस दुर्लभ सर्जरी को "AIIMS Delhi Jagga Balia Craniopagus Surgery" नाम दिए जाने का सुझाव दिया और कहा कि यह चिकित्सा जगत में एक मील का पत्थर साबित होगा। जुड़वा भाई जग्गा और बलिया 7 सितंबर को ओडिशा में अपनी धरती पर पैर रखेंगे और इसी दिन भारत का चंद्रयान 2 चांद पर पहुंचेगा। आज ये साबित हो गया कि अंतरिक्ष के वैज्ञानिक ही नहीं हमारे डॉक्टर भी असाधारण प्रतिभा और योग्यता के धनी हैं । हमें अपने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के साथ अपने डॉक्टरों पर भी गर्व है, जिन्होंने दोनों बच्चों को अलग करके इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि एम्स के डाक्टरों के इस असाधारण कार्य के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। पिछले पचास सालों में इस तरह के मामले वाले 10-15 ही बच्चे हैं जो जीवित हैं। लेकिन एम्स के डॉक्टरों ने इस कठिन काम को कर दिखाया।

उन्होंने कहा कि मैं यहां यह सब विस्तार से इसलिए लिख रहा हूं, ताकि आप जग्गा और बलिया की कहानी समझने के साथ साथ यह भी समझ सकें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की कोशिश है कि हर किसी के दर्द को समझ कर उसे दूर किया जा सके । विदेशों में इस तरह के ऑपरेशन पर 17 करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आता है, लेकिन एम्स ने जग्गा और बलिया का पूरा इलाज मुफ्त में किया । एम्स अपने सामाजिक दायित्वों को समझता है । वाकई डॉ दीपक गुप्ता और एम्स की पूरी टीम को इस दुर्लभ और सफल सर्जरी के लिए सलाम । इस सफल सर्जरी के साथ हमने दुनिया को यह दिखा दिया है कि हम अगर अपने चंद्रयान-2 से चांद को नापने के लिए तैयार हैं, तो हम मेडिकल साइंस में भी बहुत आगे निकल आए हैं । उन्होंने कहा कि इस पूरे केस ने मेरे दिमाग में एक और बड़ा सवाल खड़ा किया है । एक आम आदमी के लिए एक छोटी सी सर्जरी झेल पाना भी मुश्किल होता है, तो आखिर ये दोनों बच्चे इतनी बड़ी सर्जरी को कैसे झेल गए ? वाकई यह बड़ा सवाल है । दोनों बच्चे ओडिशा के आदिवासी बहुल कंधमाल जिले से आते हैं । ऐसे में डॉक्टरों की टीम को इस पर शोध करने की जरूरत है कि कहीं कंधमाल की हवा और मिट्टी तो कुछ खास नहीं , जहां आज भी आदिवासी समुदाय के लोगों के जीवन का आधार प्रकृति ही है ।

करीब ढाई साल से एम्स में उपचार करा रहे ओडिशा के जुड़वा भाई जग्गा और बलिया की अब घर वापसी हो रही है, सिर से जुड़े ये दोनों भाईयों को 14 जुलाई 2017 को एम्स में भर्ती कराया गया था, 25 अक्टूबर को सर्जरी कर उन्हें एक दूसरे से अलग किया गया, अब दोनों काफी हद तक स्वस्थ हैं एम्स के 60 से ज्यादा डॉक्टरों की टीम ने 25 अक्तूबर 2017 को अमेरिका से मंगाए 3डी मॉडल के आधार पर इस दुर्लभ सर्जरी को अंजाम दिया था, सर्जरी में डॉक्टरों को 25 घंटे से ज्यादा का वक्त लगा था।