नई दिल्ली, 08-05-2020: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन आज विश्व रेडक्रॉस दिवस और इस संगठन के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, नई दिल्ली में इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी(आईआरसीएस) के मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड19 से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा जरूरतमंद लोगों में वितरण के लिए भेजी जा रही राहत सामग्री के वाहन को भी हरी झंडी दिखाई।



डॉ हर्ष वर्धन के साथ आईआरसीएस के महासचिव श्री आर के जैन भी उपस्थित रहे। इनके अलावा IFRC के Acting Head of Country Clusters श्री उदय रेगमी जी, ICRC के Head of Regional Delegations श्री याहिया अल्बी जी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ रेडक्रॉस के स्वयंसेवकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

डॉ हर्ष वर्धन ने 40000 से अधिक इंडियन रेडक्रॉस के स्वयंसेवकों की नि: स्वार्थ सेवा की सराहना की। ये स्वयंसेवक 550 जिलों में विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोविड19 से उत्पन्न स्थिति में जरूरत मंद लोगों को राहत सामग्री का वितरण इस संगठन का समाज के प्रति अगाध समर्पण का प्रमाण है।

इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा आज भेजी जा रही राहत कोविड राहत आपूर्ति में 1,00,000 से अधिक फेस मास्क, 4000 सर्जिकल दस्ताने, 100 पीपीई किट, 2400 बोतलें हैंड सैनिटाइज़र तथा अन्य सामग्री है।

इस अवसर पर उपस्थित रेडक्रॉस के अधिकारियों व स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि आज का दिन इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। किसी भी संगठन के लिए 100 वर्ष पूरे कर लेना बहुत ही प्रतिष्ठा की बात है और उसमें भी जिस उद्देश्य को लेकर वह संगठन बना हो वही भावना 100 साल तक अक्षुण्ण बनी रहे। इस नाते रेडक्रॉस बहुत ही भाग्यशाली है। इस अवसर पर डॉ हर्ष वर्धन ने रेडक्रॉस के सभी स्वयंसेवकों को धन्यवाद दिया।

आज रेडक्रॉस कोविड19 से उत्पन्न विषम परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी समझकर समाज की हर मोर्चे पर सहायता करने में जुटा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दुनिया में कितने ही वायरस आए और चले गए लेकिन कोविड19 की अलग ही पहचान है और इसे सबसे घातक होने के साथ-साथ इस बात के लिए भी जाना जाएगा कि इस वायरस से निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण से राहत मिली, जीवन दायिनी नदियां साफ हो गईं। आज लोग घर परिवार में मिलजुल कर क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहे हैं। आज कोविड की वजह से ही रेडक्रॉस के 100 वर्ष पूरे पर यहां देशभर से आने वाले लोगों का आना-जाना बचा। उससे होने वाले प्रदूषण से वातावरण मुक्त रहा।

ये ठीक है कि ये कोई खुशी की बात नहीं है लेकिन हम देखते हैं कि थैलेसीमिया के जिन मरीजों को कोविड19 की वजह से रक्त मिलने में परेशानी हो रही थी। उसका भी समाधान निकला और रेडक्रॉस की एंबुलेंस ही स्वैच्छिक रक्तदाताओं के पास जाकर रक्त एकत्र कर ला रही है या वह रक्तदाताओं को रेडक्रॉस लाकर ब्लड डोनेट करने के बाद उन्हें वापस उनके घर छोड़ कर आ रही है।

डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि उन्होंने पिछले दिनों नीति आयोग के एक कमरे में ही बैठकर देश के 92,000 स्वयंसेवी संगठनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करी, इतने कम समय में इतने लोगों के संग एक साथ बात करना संभव नहीं था । उन्होंने इसे कोविड की ही देन बताया।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि आज पूरा देश कोविड19 के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रहा है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश के 135 करोड़ लोग लॉकडाउन के तहत सोशल डिस्टेंसिंग अपनाते हुए अनुशासन का पालन कर रहे हैं। इसीलिए आज भारत विश्व में सबसे बेहतर है।

देश में कोविड19 से पीड़ित लोगों की मृत्यु दर विश्व में सबसे कम है। हमारे यहां डबलिंग रेट भी सबसे बेहतर है। शेष विश्व की तुलना में हम सभी मानकों पर बेहतर हैं। हमारी रणनीतियों की विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी प्रशंसा करी है।

हम आगे भी धैर्यपूर्वक सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल करते हुए लॉकडाउन का पालन करें और देश से कोविड19 को भगाने में सहायक बनें।

डॉ हर्ष वर्धन ने रेडक्रॉस के स्वयंसेवकों से अपील करी कि वे समाज में कोविड के संदिग्ध या ठीक होकर जा रहे लोगों को अछूत की दृष्टि से देखे जाने की घटनाओं का भी संज्ञान लें। इसके अलावा डॉक्टर्स तथा स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ समाज के कुछ असंवेदनशील व्यक्ति भी इसी तरह की घटनाओं में संलिप्त रहे हैं। इन घटनाओं की जितनी निंदा की जाए कम है। डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि रेडक्रॉस के स्वयंसेवक इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए समाज में जिम्मेदार भूमिका निभा सकते हैं।