14 अक्टूबर 2019: बारापुला नाले के गंदे पानी को साफ करने से संबंधित भारत-डच परियोजना का दूसरा चरण सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन और नीदरलैंड के शाही दंपत्ति His Majesty King Willem-Alexander और Her Majesty Queen Maxima की मौजूदगी में शुरू किया गया।



दिल्ली पहुंचे शाही दंपत्ति ने दोपहर में जल शोधन प्रयोगशाला का दौरा किया और परियोजना पर काम कर रहे कुछ शोधार्थियों से बातचीत की। उन्होंने इस परियोजना को बड़ा सहयोग करार दिया। इस परियोजना को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा नीदरलैंड सरकार के नीदरलैंड्स ऑर्गेनाइजेशन फॉर साइंटिफिक रिसर्च का समर्थन प्राप्त है। भारत-नीदरलैंड जल प्रयोगशाला के लिए शाही जोड़े की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग के महत्व को दर्शाती है।

इस अवसर पर डॉ हर्षवर्धन ने कहा आज, हम दूसरे चरण में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिसमें प्रतिदिन 10 हजार लीटर सीवेज पानी को साफ किया जाएगा। डच और भारतीय कंपनियां अपनी मौजूदा तकनीकों को साझा करके परियोजना में योगदान दे रही हैं और यह बताएंगी कि शहरी अपशिष्ट जल को विभिन्न प्रयोजनों के लिए स्वच्छ पानी में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम देश भर की अन्य परियोजनाओं में भी इस योजना का अनुकरण करने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान को किसी सीमा में बांध कर नहीं रखा जाना चाहिए। उसका फायदा संपूर्ण मानव जाति तक पहुंचना जरूरी है। हमारे वैज्ञानिक आज कचरे को wealth में बदलने का उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। जिससे शहर के साथ -साथ वातावरण भी स्वच्छ बनाने में सहायता मिलेगी।

यह परियोजना जुलाई 2017 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य अपशिष्ट जल प्रबंधन करना है जो स्वच्छ पानी का उत्पादन करेगा जिसका विभिन्न प्रयोजनों के लिए पुन: उपयोग किया जा सकता है। स्केल मॉड्यूलर प्लांट प्रतिदिन 10,000 ली. सीवेज पानी को साफ कर अंतिम उपयोगकर्ता के लिए एक आत्मनिर्भर मॉडल का प्रदर्शन करेगा।