15 नवंबर 2019: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज पुरस्कार समारोह में 'ग्लोबल कूलिंग प्राइज़' (GCP) के फाइनल में पहुंचने वाले 8 संस्थानों की घोषणा की। प्रतियोगिता का आयोजन भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, यूएस स्थित रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट, मिशन इनोवेशन, 24 देशों और यूरोपीय संघ की एक अंतर्राष्ट्रीय पहल के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा (Clean energy) के क्षेत्र में अनुसंधान को तेज करना है। इस पुरस्कार समारोह में दुनिया भर के इनोवेटर्स, स्टार्ट-अप्स, रिसर्च इंस्टीट्यूट्स, यूनिवर्सिटीज और प्रमुख Air Conditioners इंडस्ट्री निर्माताओं से 139 आवेदन मिले हैं। भारत से सबसे अधिक 45 आवेदन प्राप्त हुए थे। इस कार्यक्रम के 08 फाइनलिस्ट को भारत में वास्तविक क्षेत्र में परीक्षण के लिए दो प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए 200,000 डालर के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार से शीतलन प्रौद्योगिकी में नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जो भारत से होकर दुनिया भर में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है।



चयनित फाइनलिस्ट को पुरस्कार प्रदान करते हुए, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री, डॉ हर्ष वर्धन ने इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान के उद्देश्यों के साथ गठबंधन की पहल को केंद्र सरकार ने अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए इस साल के शुरू में जारी किया था। वैश्विक जलवायु परिवर्तन का क्षेत्र और स्वच्छ ऊर्जा नवाचारों में तेजी लाने के लिए देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

'ग्लोबल कूलिंग' पुरस्कार समारोह में अपना संबोधन देते हुए, डॉ हर्ष वर्धन ने उल्लेख किया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसे मुद्दों पर अग्रणी रहा है। स्वच्छ ऊर्जा पर प्रधानमंत्री द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कुशल और योग्य अनुकूल कूलिंग समाधान हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने 'ग्लोबल कूलिंग' पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि सभी फाइनलिस्ट Energy Efficiency लागत के व्यापक मापदंडों के भीतर जलवायु अनुकूल समाधान देने की क्षमता वाले प्रोटोटाइप विकसित करेंगे।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि कॉर्बन उत्सर्जन में कमी और ऊर्जा को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन पिछले कुछ सालों में हमने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किये हैं। हम तय लक्ष्यों से पहले अपना काम पूरा कर रहे हैं। नई तकनीक के माध्यम से कैसे हम ऐसे एयर कंडीशनर बना सकते हैं जिनसे कार्बन उत्सर्जन कम हो। 'ग्लोबल कूलिंग' पुरस्कार पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस प्रतिस्पर्धा में केवल भारत के लोगों को नहीं बल्कि पूरे विश्व के लोगों को इसमें शामिल किया गया है और आज जो भी लोग फाइनल के लिए चुने गए हैं उसमें कई लोग भारत के हैं।