27 नवंबर 2019: इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने वाले "Prohibition Of Electronic Cigarettes (Production, Manufacture, Import, Export, Transport, Sale, Distribution, Storage And Advertisement) Bill, 2019" , को लोकसभा में पास कराने में सहयोग देने के लिए सभी माननीय सदस्यों का बहुत-बहुत आभार। यह बात केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज लोकसभा में ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट प्रतिबंध विधेयक’ को ध्वनिमत से पारित होने के बाद कही। विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने से देश में युवा पीढ़ी को ई-सिगरेट के नशे की चपेट में आने से रोका जा सकेगा।



डॉ हर्ष वर्धन ने ई-सिगरेट से होने वाले नुकसान का विस्तार से विवरण देते हुए कहा कि इससे कई प्रकार के विषैले पदार्थ निकलते हैं जिससे कई बीमारियां होती हैं और इसका जहर अचानक शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित करता है। ई-सिगरेट में निकोटिन पाया जाता है और अगर निकोटिन का सेवन किया जाय तो कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है। पहले निकोटिन सल्फेट का प्रयोग कीटनाशक के रूप में किया जाता था लेकिन इस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। ई-सिगरेट पर प्रतिबंध को युवाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए डा हर्ष वर्धन ने कहा कि दुनिया की कई तंबाकू कंपनियां भारत में ई सिगरेट उत्पाद पेश कर युवाओं को लक्षित करना चाहती थीं, ऐसे में एक जिम्मेदार सरकार होने के नाते हमने इस पर प्रतिबंध लगाया है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने ई-सिगरेट के इस्तेमाल से होने वाले गंभीर खतरे को देखते हुए एक अध्यादेश के जरिए पूरे देश में ई-सिगरेट के आयात, उत्पादन, बिक्री, विज्ञापन, भंडारण और वितरण पर रोक लगा दी थी। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के लिए एक वर्ष तक के कारावास अथवा एक लाख रुपए के जुर्माने या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि भारत में कुल आबादी के करीब 0.2 फीसदी लोगों द्वारा ही ई-सिगरेट का इस्तेमाल करने की खबर है। लेकिन हाल ही में स्कूल के औचक निरीक्षण में बच्चों के बैग में 150 इसके उपकरण (वेपिंग डिवाइस) पाए गए। ऐसे में हमारा मानना है कि युवाओं के संदर्भ में खास तौर पर इसके गंभीर खतरे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की निशानी के तौर पर पेश की जा रही ई-सिगरेट को इसके आकर्षक डिजाइन, धुआंधार मार्केटिंग और विज्ञापन में ग्लैमर के जरिये बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इसके हानिकारक प्रभाव से युवाओं को बचाना जरूरी है ।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अमेरिका में भी ई-सिगरेट के हानिकारक प्रभाव सामने आए हैं। ई-सिगरेट का स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव होता है, इससे फेफड़े, हृदय, जिगर पर असर होता है और हाइपरटेंशन सहित अन्य बीमारियां भी होती हैं। उन्होंने Global Adult Tobacco Survey - 2016 के हवाले से बताया कि देश में 15 से 24 वर्ष के बीच की 96.6% आबादी धूम्रपान नहीं करती। सरकार इसी उम्र वर्ग के बच्चों व युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ई सिगरेट पर रोक लगाना चाहती है।