02 दिसंबर 2019: देश में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट को प्रतिबंधित करने वाले विधेयक को सोमवार को संसद से मंजूरी मिल गयी। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन द्वारा राज्यसभा में पेश ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, विक्रय, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) प्रतिषेध विधेयक, 2019 को उच्च सदन ने चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा से यह विधेयक पिछले सप्ताह ही पारित हो चुका है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुये डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि दुनिया की तमाम अग्रणी तंबाकू कंपनियों ने भारत में युवाओं और किशोरों को लक्षित करते हुये ई-सिगरेट उत्पाद उतारने की तैयारी कर ली थी। देश की युवा शक्ति को इस खतरे से बचाने के लिये एक जिम्मेदार सरकार होने के नाते हमने इस पर प्रतिबंध लगाया है।



केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि यह सही है कि भारत में कुल आबादी के 0.2 प्रतिशत लोगों द्वारा ही ई-सिगरेट का इस्तेमाल करने का अनुमान है। लेकिन हाल ही में दिल्ली के स्कूलों के औचक निरीक्षण में बच्चों के बैग से ई-सिगरेट के इस्तेमाल में काम आने वाले 150 वेपिंग डिवाइस पाए गए। उन्होंने कहा कि एक सर्जन होने के नाते मैंने स्वयं तंबाकू जनित बीमारियों के मरीजों का इलाज किया है इसलिये उन्हें इसकी गंभीरता का अहसास है। सरकार ने किसी तरह के दबाव में आये बिना यह फैसला किया है और इस बारे में सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है।

सिगरेट, बीड़ी की तुलना में ई-सिगरेट के कम नुकसानदायक होने की विपक्षी सदस्यों की दलील का जवाब देते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कम नुकसानदायक होने का मतलब यह नहीं है कि इसका कोई नुकसान नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुये सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से ई सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया था। अगस्त 2018 में एक जनहित याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंत्रालय से इस संबंध में एक नीति बनाने को कहा था। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने ई सिगरेट पर अपने श्वेत पत्र में इस पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा कि ई सिगरेट का स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव होता है। इससे फेफड़े, हृदय, जिगर पर असर होता है और हाइपरटेंशन सहित अन्य बीमारियां भी होती हैं। डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि हमने 2025 तक तंबाकू के उपभोग को 30 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत तंबाकू उत्पादों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभा रहा है और दुनिया ने इस दिशा में भारत के नेतृत्व को स्वीकार भी किया है।