06 दिसंबर 2019: केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज जोधपुर में DST Water Innovation Centre का शुभारंभ किया। DST Water Innovation Centre का शुभारंभ इस क्षेत्र के लिए काफी मायने रखता है क्योंकि इससे राजस्थान के इस शुष्क क्षेत्र में खाद्य और जल सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा इस केंद्र के शुरू होने से सतही व भू-जल का सही आंकलन भी किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त उन्होंने मालुंगा में सतत् ग्रामीण औद्योगिकीकरण के विकास के लिए एक सूक्ष्म औद्योगिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी परिसर (Micro Industrial Technology Complex) राष्ट्र को समर्पित की। इसका निर्माण 6 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। सूक्ष्म औद्योगिक कॉम्पलेक्स एक नवाचार है, जो पर्यावरण की रक्षा करते हुए स्थानीय नागरिकों की बढ़ती जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करेगा। डॉ हर्ष वर्धन ने जोधपुर के ICAR-Central Arid Zone Research Institute में Dry Land Gallery का भी अवलोकन किया। इस म्यूजियम में शुष्क भूमि में फसल उत्पादन की विभिन्न तकनीकों को प्रदर्शित किया गया है।



Water Innovation Centre और Micro Industrial Complex के उद्घाटन के बाद वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि कोई भी प्लांट मानवता के लिए भगवान का काम करते हैं। केन्द्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक संस्‍थाओं के असाधारण सामर्थ्‍य को एकजुट करके सामाजिक चुनौतियों के समाधान हेतु विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की सरकार की प्रतिबद्धता पर बल दिया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि देश को इस समय एक ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जो हमें प्रेरणा देने का काम करता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विज्ञान की औपचारिक पढ़ाई नहीं की है लेकिन वो विज्ञान का प्रयोग जनता के हित में करने के लिए इतने गहरे सुझाव देते हैं कि हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के Swachh Bharat Mission के तहत पिछले 5 वर्षों में 6 लाख से अधिक गांव खुले में शौचमुक्त हो गए। अभियान की सफलता को देखते हुए भारत में सेनिटेशन के सिद्धातों का अध्ययन करने के लिए 125 देशों के प्रतिनिधि भारत आने को मजबूर हुए। डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि देहरादून में विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्लांट में प्लास्टिक के कचरे से डीजल बनाया जा रहा है। उस प्लांट में रोजना एक टन प्लास्टिक से 800 लीटर डीजल बनाया जा रहा है। भारत आज उन तीन देशों में शामिल हो गया है जो बायोफ्यूल से हवाई जहाज उड़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रमुख भारतीय जल तथा कृषि संस्‍थानों द्वारा उपकरणों और तकनीकों का विकास और प्रयोग भारतीय जनता की समस्‍याओं के समाधान में अत्‍यंत महत्‍व रखता है । वर्तमान प्रयास इस दिशा में उठाए गए ऐसे ही कदम हैं । उन्होंने कहा कि जल कृषि के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण साधन है और यह, उद्योग और घरेलू क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन बढ़ती मांग के कारण सीमित होता जा रहा है। अत: उपलब्‍ध जल का न्‍यायसम्‍मत उपयोग आवश्यक है। जल के महत्‍व, जल की उपलब्धता और सिंचाई के प्रयोजन में दिन-प्रतिदिन जल की बढ़ती मांग को ध्‍यान में रखते हुए उन सूक्ष्‍म सिंचन प्रणालियों को अपनाने के प्रयास किए जाने चाहिए, जोकि जल की बचत (40-50%), पैदावार गहनता और सिंचित क्षेत्र में वृद्धि और उच्‍चतर अन्‍न पैदावार में सहायता करती हैं। “जल की प्रति बूंद अधिक फसल” पहल अपनाकर कृषि में जल की उत्पादकता में सुधार के लिए काफी गुंजाइश मौजूद है। केंद्रीय मंत्री ने जल नवाचार केंद्रों की अवधारणा और खाद्य और जल सुरक्षा प्रदान करने के लिए तकनीकों के अनुप्रयोग की सराहना की। उन्होंने भारतीय कृषि और जल प्रणाली हेतु प्रौद्योगिकीय जानकारी प्रदान करने के लिए अंतर-मंत्रालयी सहयोग की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।