09 नवंबर 2019: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज दिल्ली में संस्कृतभारती के विश्व संस्कृत सम्मेलन का उद्धाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री प्रताप चंद्र सारंगी, संस्कृतभारती के अध्यक्ष प्रो भक्तवत्सल शर्मा व महामंत्री श्रीश देव पुजारी जी उपस्थित थे। इस तीन दिवसीय विश्व संस्कृत सम्मेलन में भारत समेत अमेरिका, इंग्लैंड, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, रूस, न्यूजीलैंड और अरब देश मिला कर कुल 21 देशों के चार हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया| संस्कृतभारती पिछले चार दशक से दुनिया में संस्कृत भाषा के संरक्षण व संवर्द्धन में जुटी हुई है।



इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि अपने 50 वर्ष के संघ आयु और 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन में इससे पहले मुझे किसी कार्यक्रम में ऐसी आनंद की अनुभूति नहीं हुई, जितनी आज हो रही है। उन्होंने कहा कि आज हम सभी के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण दिवस है| विश्व संस्कृत सम्मेलन के दिन ही अयोध्या पर फैसला आना एक विचित्र संयोग है। संस्कृत भारती के जो कार्यकर्ता काम करते हैं उनके अंदर कोई न कोई सात्विक शक्ति है। उन्हें पहले से आभास हो गया था कि नौ तारीख एक खास दिन रहेगा।

उन्होंने कहा कि देवभाषा संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु नीति बनाने अनेक देशों से पधारे गणमान्य सदस्यों के बीच इस महासम्मेलन का उदघाटन कर मुझे बेहद आनंद की अनुभूति हुई।डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, इसमें भारत की संस्कृति, गौरव, शौर्य और ज्ञान का अद्भुत भंडार छिपा है। जन कल्याण के लिए इस छिपे भंडार का सदुपयोग जरुरी है।उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में संस्कृत भाषा के प्रसार के लिए तीन वर्षो की रणनीति बनाई जाएगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संस्कृत भारती ने अपनी 38 वर्ष की यात्रा में एक करोड़ से अधिक लोगों को संस्कृत का ज्ञान देने का काम किया है। आज इस कार्यक्रम में देश के 593 जिलों के अलावा विश्व के 21 देशों के प्रतिनिधि जुटे हुए हैं जो की सम्मान की बात है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के शिक्षामंत्री रहते हुए बच्चों में मूल्यों को विकसित करने और उनके विकास के लिए हमने राजधानी में 'भारत वैभव प्रतिष्ठान' कार्यक्रम लांच किया और संस्कृतभारती के प्रयास से दिल्ली के विद्यालयों में संस्कृत को पढ़ाने के लिए अध्यापकों को तैयार किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली का शिक्षामंत्री रहते हुए मुझे सात्विक सुख मिला और मुझे एहसास हुआ कि यह सही मायने में ईश्वरीय कार्य है।

11 भाषाओं में पत्राचार के माध्यम से लोगों के बीच संस्कृत के प्रति प्रेम पैदा करने के लिए संस्कृतभारती को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि आज 21 देशों में एक लाख लोग संस्कृत भाषा को पढ़ रहे हैं, हमारे लिए इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में संस्कृत भाषा को जो न्याय संगत स्थान मिलना चाहिए वो नहीं मिला।

इससे पहले आज सुबह इस विश्वसम्मेलन के पहले दिन केन्द्रीय मंत्री श्री वी मुरलीधरन जी ने एक प्रदर्शिनी ‘प्रज्ञानम्’ का उद्घाटन किया। सम्मेलन में आयोजित ‘प्रज्ञानम्’ प्रदर्शनी में 'संस्कृत में विज्ञान', संस्कृत डॉक्यूमेंट्री, पांडुलिपियां, संस्कृत शिलालेखों, महाकवि कालिदास जी के जीवन पर और संस्कृत भारती की विभिन्न भाषाओं में लिखी पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं।