24 दिसंबर 2019: केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर स्मृति स्थल स्थित उनकी समाधि 'सदैव अटल' पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की व प्रार्थना सभा में भाग लिया। 'सदैव अटल' स्मृति स्थल देशवासियों के लिए उनके विचारों की तरह प्रासंगिक व प्रेरणास्रोत है। इस दौरान स्मृति स्थल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी व अनेक केन्द्रीय मंत्रियों, सांसदों, विधायकों व अन्य नेताओं ने अटल जी को पुष्पांजलि अर्पित की।



हिमालय जैसे विराट व्यक्तित्व के धनी, अटल बिहारी वाजपेयी जी छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक रहे। अटलजी ने अपने जीवन में पत्रकार के रूप में भी काम किया और लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य, और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। अटल जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे और उन्होंने लंबे समय तक डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी और पं दीनदयाल उपाध्याय जैसे प्रखर राष्ट्रवादी नेताओं के साथ काम किया।

भारत के बहुदलीय लोकतंत्र में अटल जी एक मात्र ऐसे राजनेता थे जो सभी दलों को स्वीकार्य रहे।

वो तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। भारत की संस्कृति, सभ्यता, राजधर्म, राजनीति और विदेश नीति की इनको गहरी समझ थी। बदलते राजनैतिक पटल पर गठबंधन सरकार को सफलतापूर्वक बनाने, चलाने और देश को विश्व में एक शक्तिशाली गणतंत्र के रूप में प्रस्तुत करना अटल जैसे करिश्माई नेता के बूते की ही बात थी। प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में जहां अटल जी ने पाकिस्तान और चीन से संबंध सुधारने हेतु अभूतपूर्व कदम उठाए वहीं अंतर्राष्ट्रीय दवाबों के बावजूद गहरी कूटनीति तथा दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए पोखरण में परमाणु विस्फोट किए तथा कारगिल-युद्ध में विजय श्री प्राप्त की। राजनीति के दिग्गज राजनेता, महान कूटनीतिज्ञ, लोकप्रिय जननायक और कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ अटल जी एक अत्यंत सक्षम और संवेदनशील कवि, लेखक और पत्रकार भी रहे। उनकी कविताएं राष्ट्रवाद की भावना से ओत-प्रोत रहती थी।