नई दिल्ली, 03-05-2020: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के 49 वें स्थापना दिवस और जुबली वर्ष की शुरुआत के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभाग के स्वायत्त संस्थानों के सभी निदेशकों के साथ बातचीत की।



उन्होंने बताया कि आज भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्थान विश्व में, अमरीका और चीन के बाद, बढ़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। हम वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर हैं। इस विभाग के साथ सीएसआईआर व जैव प्रौद्योगिकी विभाग मिलकर कोविड के खिलाफ नई दवा और नई वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। इन्हीं विभागों से नए -नए स्टार्ट्अप्स को प्रोत्साहन मिल रहा है। नए उद्योग विकसित हो रहे हैं। कोविड19 के समाधान के लिए नई संकल्पनाओं के आधार पर अनुसंधान किए जा रहे हैं।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने युवा शोधकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें नेशनल पोस्ट डॉक्टरल फैलोशिप, प्रारंभिक कैरियर अनुसंधान पुरस्कार, ओवरसीज डॉक्टरल फैलोशिप, ओवरसीज पोस्ट डॉक्टरल फैलोशिप इत्यादि शामिल हैं।

युवाओं के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति, कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इसके अलावा AWSAR,NIDHI और MANAK जैसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।

सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और बायोटेक का कोविड के खिलाफ लड़ाई में विशेष योगदान है। इनमें पीपीई किट्स,इलेक्ट्रोस्टेटिक व एन 95 मास्क विकसित करने के अलावा वैक्सीन और दवा पर शोध कार्य चल रहे हैं।

इसके उपरांत मीडिया से बात से बात करते हुए डॉ हर्ष वर्धन ने बताया कि कार्यक्रम में उन वैज्ञानिकों से भी सार्थक चर्चा हुई जो अपनी प्रयोगशालाओं के माध्यम से कोविड19 की लड़ाई को और अधिक मजबूत कर रहे हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग वैक्सीन बनाने की ओर अग्रसर रहने से लेकर डिजिटली कोविड कथा के माध्यम से कोविड 19 के संबंध में संपूर्ण व सही जानकारी जन-जन तक पहुंचा कर इस युद्ध में देश की जीत सुनिश्चित कर रहा है।