नई दिल्ली,26 फरवरी, 2020: केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने आज जैव प्रौद्योगिकी विभाग के 34वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिरकत की। National Institute of Immunology, अरुणा आसफ अली मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम का डॉ हर्ष वर्धन ने उद्घाटन किया।



उनके साथ मंच पर जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ रेणु स्वरूप के अलावा जैव प्रौद्योगिकी विभाग में वैज्ञानिक 'जी' डॉ मोहम्मद असलम, पद्मश्री प्रोफेसर डी बालासुब्रमण्यन, साइंटिस्ट एन्ड डायरेक्टर ऑफ़ रिसर्च वी प्रसाद आई इंस्टिट्यूट (LVPEI), हैदराबाद तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग में वैज्ञानिक डॉ मीनाक्षी मुंशी जी उपस्थित थीं।

इस अवसर पर डॉ हर्ष वर्धन ने जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैज्ञानिकों और संगठनों को, उनके योगदान तथा अनुसंधान उत्कृष्टता के लिए 'DBT-BRITE Awrads' प्रस्तुत किये।

इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में योगदान के लिए जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की मजबूत नींव बनाने में @DBTIndia का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि भारत दुनिया के शीर्ष 12 जैव प्रौद्योगिकी स्थलों में से एक है। जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों और सेवाओं की लगातार बढ़ती मांग 2025 तक 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को स्थापित करने का आधार रही है।

उन्होंने कहा कि विभाग ने एक जीनोम इंडिया मिशन शुरू किया है, जो मानव जीनोम को सूचीबद्ध करने के लिए प्रथम भारतीय पहल है। यह मानव जीनोम पर देश भर में 20000 विविध जातीय आबादी के पूरे जीनोम को मैप करने वाली पहली स्वदेशी पहल है।