नई दिल्ली, 15-05-2020: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने कोविड19 पर जारी जंग के बीच आज राष्ट्रमंडल देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में भाग लिया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई बैठक का विषय था- एक समन्वित राष्ट्रमंडल कोविड19 प्रतिक्रिया देना।



सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने सबसे पहले इस महामारी के कारण अपनी जान गंवा चुके लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। डॉ हर्ष वर्धन ने कोरोनावारियर्स के जबरदस्त योगदान और साथ ही कीमती जान बचाने में अन्य नागरिक निकायों के प्रति आभार प्रकट किया।

भारत ने माननीय पीएम श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में उच्चतम स्तर की राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ कोविड19 का सफल प्रबंधन किया जिससे कोविड19 के खिलाफ प्रोएक्टिव और एक के बाद एक श्रेणीबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई।

भारत ने देश के प्रवेश स्थलों पर निगरानी, ​​विदेशों से हमारे नागरिकों की निकासी, रोग निगरानी नेटवर्क के माध्यम से सामुदायिक निगरानी, ​​स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण, जोखिम संचार और सामुदायिक भागीदारी सहित सभी आवश्यक और समय पर कदम उठाकर इस महामारी पर नियंत्रण के प्रयास किए।

इस महामारी के प्रसार को रोकने के प्रयास में दुनिया के सबसे बड़े लॉकडाउन को देश में लागू किया गया। डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मजबूत स्वास्थ्य रक्षा प्रणाली रोग फैलने से रोकने में सक्षम बने। उन्होंने कहा कि कोविड की विस्फोटक वृद्धि को कम करके अपने स्वास्थ्य की रक्षा करना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य है। हम लोगों की बचत के साथ-साथ उनकी आजीविका के लिए भी चिंतित हैं इसलिए आवश्यक सेवाओं को लॉकडाउन के दायरे से बाहर रख रहे हैं।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि प्रधान मंत्री जी ने 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है ताकि आर्थिक सुधार के साथ-साथ कमजोर वर्गों को भी सहारा दिया जा सके।

कोविड19 से लड़ने के लिए वैश्विक कार्रवाई का आग्रह करने वाला भारत पहला देश है। हमने मार्च के मध्य में हमारे क्षेत्र में सार्क नेताओं की एक बैठक बुलाई जिसमें “साथ आने, अलग न होने की आवश्यकता”; सहयोग भ्रम नहीं; और तैयारी, घबराहट नहीं ", पर विशेष बल दिया गया था। जो इस संकट के प्रति भारत के रुख को दर्शाती है।

भारत ने संकट के इस समय के दौरान लगभग 100 जरूरतमंद देशों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन जैसी आवश्यक दवाइयां प्रदान की हैं, जो एकजुटता और समर्थन प्रतीक है।

महामारी के कारणों पर काम करना और कोविड19 को नियंत्रित करने के साथ-साथ इसके दुबारा होने को रोकने के लिए दवाओं और वैक्सीन की खोज करना महत्वपूर्ण है।

भारतीय वैज्ञानिक भारत सरकार के सक्रिय समर्थन से वैक्सीन, ड्रग्स के साथ-साथ कम लागत वाली डायग्नोस्टिक किट और विभिन्न जीवन रक्षक उपकरणों के विकास पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड युग में नए खतरों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए अपनी सर्वोत्तम क्रियाकलापों को पारस्परिक रूप से समर्थन और साझा करने की आवश्यकता है।

सभी, मौजूदा और नए दोनों, प्रासंगिक चिकित्सा उत्पादों और प्रौद्योगिकियों तक सार्वभौमिक रूप से और सस्ती पहुंच को सुविधाजनक बनाया जाना बहुत महत्वपूर्ण है। कोविड-19 से निपटने के लिए इनकी उपलब्धता को उचित और न्यायसंगत बनाया जाना चाहिए ।