17 सितंबर 2019: 2022 तक देश भर में आयुष्मान भारत के तहत कुल 1.5 लाख हेल्थ और वेलनेस सेंटर बनाए जाएंगे यह बात आज केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में प्रेस को संबोधित करते हुए कही। इस मौके पर आयुष्मान भारत के CEO श्री इंदु भूषण जी व स्वास्थ्य सचिव श्रीमती प्रीति सूदन भी मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 23 सितंबर को प्रारंभ किए गए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश के सारे प्राइमरी हेल्थ सेंटर को हेल्थ और वेलनेस सेंटर के अंतर्गत परिवर्तित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत एक ऐसा “जन आंदोलन” है जो इस देश के नागरिकों को उनके अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की ओर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर से देश भर में आयुष्मान भारत पखवाड़े का शुभारंभ किया गया है। इसके तहत जम्मू कश्मीर से लेकर मणिपुर और दक्षिण के हर राज्य में इसे लेकर भारी उत्साह देखा गया। उन्होंने इस दौरान कोलार के अपने अनुभव भी बांटे।



उन्होंने कहा कि वर्तमान में आयुष्मान भारत में 21 हजार हेल्थ और वेलनेस सेंटर कार्य कर रहे हैं, जिनकी संख्या मार्च 2020 तक 40 हजार करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि 32 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पहले इस योजना को लागू कर चुके हैं। इस योजना के तहत 10 करोड़ लाभार्थियों को ई-कार्ड दिया जा रहा है। योजना में भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, अत्याधुनिक धोखाधड़ी का पता लगाने, नियंत्रण और कार्रवाई तंत्र विकसित किए गए हैं और आईटी-सक्षम सेवाओं की मदद से प्रणाली में सुधार किए गए हैं।

एक साल पहले, भारत सरकार ने गरीब और वंचित नागरिकों के लिए “आयुष्मान भारत” योजना की शुरुआत की। आयुष्मान भारत ने स्वास्थ्य-क्षेत्र में, एक ऐसा सुदृढ़ ढाँचा बनाया है, जिसकी मदद से देश “सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज” पाने की ओर बढ़ सकता है । इस योजना का क्रियान्वयन सम्पूर्ण भारत में दो घटकों के माध्यम से होना सुनिश्चित है पहला, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्लूसी), देशभर में लगभग 1.5 लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के चरणबद्ध विकास के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने का लक्ष्य है, और दूसरा, प्रधानमंत्री जन-आरोग्य योजना (पीएम-जय), यह योजना, 10 करोड़ पात्र परिवारों को पूर्व-निर्धारित ऐसी आपातकालीन एवं जटिल बीमारियाँ, जिनमें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है, उनके लिए प्रत्येक वर्ष, 5 लाख रुपये तक की उपलब्ध स्वास्थ्य बीमा राशि से सम्पूर्ण भारत में किसी भी सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पताल में चिकित्सकीय सेवाएं प्राप्त करने का अवसर देती हैl