25 अक्टूबर 2019: काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने देश भर में अलग-अलग आबादी के 1,008 भारतीयों की संपूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग का आयोजन किया है। IndiGen Genome परियोजना के विवरण की घोषणा करते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि CSIR द्वारा अप्रैल 2019 में IndiGen पहल की गई थी, जिसे CSIR-Genomics and Integrative Biology (IGIB), दिल्ली और CSIR-Centre for Cellular and Molecular Biology (CCMB), हैदराबाद द्वारा लागू किया गया था। इसके तहत संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण रोगों की पहचान व उपचार के लिए अद्वितीय आनुवांशिक लक्षणों तथा संवेदनशीलता आदि का निर्धारण करने की दिशा में बेहद उपयोगी साबित होगा।



डॉ हर्ष वर्धन ने IndiGenome कार्ड और उनके साथ IndiGen मोबाइल एप्लिकेशन का अनावरण किया, जो प्रतिभागियों और चिकित्सकों को उनके जीनोम में नैदानिक रूप से कार्रवाई योग्य जानकारी का उपयोग करने में सक्षम बनाता है। उन्होंने जोर दिया कि यह गोपनीयता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जो व्यक्तिगत जीनोमिक्स को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए महत्वपूर्ण है। डॉ हर्ष वर्धन ने विस्तार से बताया कि भारत भर के व्यक्तियों में यह प्रायोगिक परीक्षण किया जा रहा है और कई भारतीय वाणिज्यिक संगठनों ने इसमें रुचि दिखाई है।

उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि CSIR से जुड़ी सेलुलर और आणविक जीवविज्ञान के लिए केंद्र और इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी ने पिछले 6 महीने में 1008 विभिन्न जन समुदायों के संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण का काम पूरा कर दिखाया है। भारत में पहली बार इस स्तर पर संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण किया गया है। 1008 का डाटा पर काम करने के बाद इस योजना को आगे बड़े स्तर पर ले जाने का आधार मिल गया है। उन्होंने कहा कि समाज को इसका लाभ मिले इसके लिए जरूरी है कि इसे आगे प्रसारित करने का एक सिस्टम हो। इसके लिए एक ऐप भी तैयार किया गया है। दुर्लभ अनुवांशिक रोगों का अध्ययन करने की दिशा में पहल करते हुए CSIR ने देश भर के 280 clinicians का एक alliance network बनाया है। इस नेटवर्क ने पूरे देश में अपना काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने कम समय में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस योजना को अभी और बड़े पैमाने पर आगे ले जाने की योजना है। विज्ञान का अमीर-गरीब से कोई लेना देना नहीं है। सरकार का उद्देश्य है कि विज्ञान के शोध का फायदा हर किसी को मिले।

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा कि IndiGen के परिणामों का उपयोग जनसंख्या के पैमाने पर आनुवांशिक विविधता को समझने के लिए किया जाएगा, नैदानिक अनुप्रयोगों के लिए आनुवांशिक रूपांतर उपलब्ध कराएंगे और रोगों की आनुवंशिक महामारी को सक्षम बनाएंगे।