No laxity in weather forecasts: Dr Harsh Vardhan


Addressing a media conference on the achievements of the Ministry of Science & Technology and Earth Sciences during the past four years, Dr Harsh Vardhan said it was for the local government to take measures to mitigate the sufferings of the people.


New Delhi (June 07) –Science & Technology and Earth Sciences Minister Dr Harsh Vardhan denied, that there was any delay on the part of India Meteorological Department in providing forecast on the recent dust storm, which had brought heavy damages and loss of lives. Addressing a media conference on the achievements of the Ministry of Science & Technology and Earth Sciences during the past four years, Dr Harsh Vardhan said it was for the local government to take measures to mitigate the sufferings of the people.

नई दिल्ली (7 जून) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि मौसम विभाग से पिछले दिनों आए तूफान के पूर्वानुमान की सूचना देने में किसी तरह की कोताही नहीं बरती गई थी। वे मंत्रालय के चार साल की उपलब्धियों की जानकारी देने के लिए संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों के जानमाल की सुरक्षा की जिम्मेवारी स्थानीय प्रशासन की होती है।

“Our weather forecasting department gives out information on time, using the latest tools to all concerned authorities including state governments. But to control disasters, there are other departments and state systems. So far as the Ministry of Earth Sciences is concerned, its agencies have the most modern tools and under normal monsoon mission, we provide information upto the block level. We have super computers with 8 petaflops – only America, England and Japan have similar computers. We can predict about dust storm upto three days in advance. But the local authorities will have steps in to mitigate the suffering of the people. How can Earth Sciences Ministry do anything?” asked Dr Harsh Vardhan.

उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से मौसम पूर्वानुमान की जानकारी समय से उपलब्ध कराई जाती है।  इसके लिए आधुनिक उपकरण के उपयोग किए जाते हैं। यहां तक कि राज्य सरकारों को भी यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है, मगर किसी आपदा के प्रबंधन की जिम्मेवारी अन्य विभागों एवं राज्य सरकारों की है। उन्होंने कहा कि जहां तक पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की बात है तो हमारी ऐजेंसियां बेहतरीन टूल्स एवं सामान्य मानसून मिशन के साथ काम करती हैं। हमारी व्यवस्था ऐसी है कि हम ब्लॉक स्तर पर भी लोगों को मौसम की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। हम लोगों के पास 8 पेटाफ्लॉप के साथ सुपर कम्प्यूटर की सुविधा है। यह व्यवस्था सिर्फ अमेरिका, इंग्लैंड और जापान के पास ही उपलब्ध है। तीन दिन पहले ही आंधी-तूफान के पूर्वानुमान की सूचना देने की सुविधा है। लेकिन, इसके प्रभावित लोगों की जिम्मेवारी स्थानीय प्रशासन की होती है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय हर चीज कैसे कर सकता है।

The government, he said, is engaged in expansion and upgradation of weather services. The MoES has recently commissioned two very high resolution weather prediction systems. The new systems have a resolution of 12 km grid scale, marking a big jump from the present level of 23 km, and are based on a 20-member ensemble system generates a range of forecasts using slightly varying initial conditions.

उन्होंने कहा कि सरकार  मौसम विभाग की सेवाओं के विस्तार और बेहतरी में लगी हुई है। मंत्रालय ने हाल ही में मौसम पूर्वानुमान के लिए दो उच्च क्षमता की प्रणालियों की शुरुआत की है।

The Minister noted that the government had taken several steps to strengthen scientific and technological capabilities of the country. The investment in science and technology and related areas has gone up in the last four years. The Department of Science and Technology has witnessed an increase of 90 %, followed by Department of Biotechnology (65%), Council of Scientific and Industrial Research (43%) and MoES (26%).

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से देश में वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को बढ़ाने के लिए विभिन्न तरह के कदम उठाए गए हैं। पिछले चार सालों में विज्ञानप्रौद्योगिकी और इससे संबंधित क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में 90% की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि जैवप्रौद्योगिकी विभाग में 65%, सीएसआईआर में करीब 43% और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में 26% की वृद्धि हुई है।

The minister said, Indian S&T is getting future ready with the launch of missions in cyber physical system, artificial intelligence, robotics, supercomputing, deep ocean, biopharmaceuticals,etc.

उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भविष्य में साइबर भौतिक प्रणालीआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसरोबोटिक्स, सुपर कंप्यूटिंगगहरे समुद्रबायोफर्मास्यूटिकल्स मिशन लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है।

In addition, a new synergy has been established between intra-ministry laboratories and inter-Ministry institutions. “Scientific laboratories have increasingly become problem resolution hubs for ministries of railways, heavy industry, urban development, defence, drinking water and sanitation, power, coal and new and renewable energy, petroleum and natural gas. The approach is to realign S& T to have a mix of fundamental science and application science,” he said.

साथ ही उन्होंने कहा कि अंतः मंत्रालयी प्रयोगशालाओं एवं अंतः मंत्रालयी संस्थानों के बीच एक नया संयोजन स्थापित किया गया है। रेलवेभारी उद्योगशहरी विकासरक्षापीने का पानी एवं स्वच्छताबिजली,कोयला एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जापेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के लिए वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं लगातार समस्या-समाधान की हब बनती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मौलिक और प्रायोगिक विज्ञान के पुनर्निमाण पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का यह मिश्रित दृष्टिकोण है।

He mentioned how joint research by CSIR, DBT and ICAR has helped develop a blight resistance improved Samba Mahsuri rice which is now being cultivated in an area of 120,000 hectares across seven states. CSIR has also launched a project in mission mode for development of chemical intermediaries and active pharmaceutical ingredient, which would help significantly reduce India’s dependence on imports especially from China.

उन्होंने कहा कि सीएसआईआर, डीबीटी और आईसीएआर ने संयुक्त रूप से अनुसंधान करने के बाद सांबा मेहसूरी चावल की ईजाद की है। इसकी पैदावार सात राज्यों के करीब 120,000 हेक्टेयर में हो रही है। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर ने कैमिकल इंटरमीडियरी एवं एक्टिव फॉर्मास्युटिकल इनग्रिडियेंट (एपीआई) के विकास के लिए मिशन-मोड में एक परियोजना शुरू की है। इसकी वजह से खासकर चीन से होने वाले आयातों पर भारत की निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।

In order to boost start-up ecosystem, the government has increased allocation for this activity by five folds in DST alone. The Ministry has supported more than 5,000 start-ups and 200 incubators. In addition, it has launched a programme called MANAK (Million Minds Augmenting National Aspiration and Knowledge) to trigger innovation among school children from sixth to 10th standard.

उन्होंने कहा कि सरकार ने स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए केवल डीएसटी मद के आवंटन में पांच गुना बढ़ोत्तरी की है। मंत्रालय ने 5000 स्टार्ट-अप और 200 इंक्यूबेटर को मदद की है। इसके साथ ही मंत्रालय ने मनक (मिलियन माइन्ड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन एंड नोलेज) कार्यक्रम लांच किया है। इसके तहत छठी से दसवीं कक्षा के स्कूली बच्चों में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

“S&T manpower is the foundation of R&D. During the last four years, we have enhanced capacity building of scientists, teachers, young researchers and attracting students to science streams. We have supported around 11 lakh students and researchers right from school level to post-doctoral research,” the minister said.

विज्ञान तकनीक मानव संसाधन का आधार अनुसंधान एवं विकास है। पिछले चार साल में मंत्रालय ने वैज्ञानिकों, शिक्षकों, युवा शोधार्थियों के क्षमता निर्माण में वृद्धि करने का प्रयास किया है। करीब 11 लाख स्कूल से लेकर पोस्ट-डॉक्टरल शोध तक विज्ञान के छात्रों को सहयोग दिया गया है।