प्रधानसेवक के सपने को साकार करने का सपना

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नया भारत 2022 के सपने को साकार करना ही मेरा सपना है। वर्ष 2022 तक भारत को एक समृद्ध, सशक्त देश बनाने के उनके सपने को साकार करने के लिए हमें तालमेल बिठाकर कार्य करना होगा। यह भारत एक ऐसा भारत होगा, जहां हर नागरिक के पास अपने सपने को हकीकत में तब्दील करने का मौका होगा और वह सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से जीवंत होगा।

प्रधानमंत्री जी ने भविष्य के भारत की रूपरेखा पहले ही स्पष्ट कर दी है- " एक नया भारत जहां गरीब दान में कुछ भी हासिल नहीं करना चाहेगा बल्कि अपने संकल्पों की सिद्धि के अवसर ढूंढ़ेगा, आम भारतीय सरकार की योजनाओं का इंतजार नहीं करेंगे, वे अपने लिए अवसरों की तलाश में होंगे ताकि वे अपने जीविकोपार्जन और समृद्धि के लिए कार्य कर सकें।"

इस लक्ष्य को पाना इतना आसान नहीं है, इसके लिए देश को लंबी दूरी तय करनी होगी। लेकिन यदि हर नागरिक इस दिशामें कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़े तो यह लक्ष्य भी हमारे लिए आसान हो जाएगा। हमे अपनी राह खुद तय करनी होगी। किसी आयातित विचारधारा से कार्यसिद्धि नहीं होगी, जैसा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने 1965 में अपने मुंबई श्रृंखला के व्याख्यान में और मोहन भागवत जी ने 30 सितंबर, 2017 को नागपुर में विजयादशमी पर दोहराया था। स्वामी जी ने हमारे भविष्य के लिए पहले ही कहा था कि हमे अपने स्वभाव के अनुरूप ही आगे बढ़ना होगा। विदेशी समाजों के अंधानुकरण से कोई लाभ नहीं होने वाला।

स्टार्ट अप और मेक इन इंडिया के जरिए मानसिकता बदलने की जरूरत है। सबसे पहले हम सभी को अपने अंदर राष्ट्र धर्म की भावना को जगाना होगा, जिसकी बात पंडित दीनदयाल उपाध्यायजी करते थे। हमारे सभी कार्य और प्रयास इस धर्म के अनुरूप ही हों, ऐसा सुनिश्चित करना चाहिए। इसी प्रकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नए भारत का सपना महज विकास के लक्ष्यों को हासिल करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका लक्ष्य शांति, एकता, सद्भावना भी है। जातिवाद और संप्रदायवाद से कोई हल नहीं निकलने वाला। किसी आस्था के नाम पर हिंसा से खुश नहीं हुआ जा सकता। भारत में यह कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री ने सात महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को चिह्नित किया है, जिसे उन्होंने भारत की इंद्रधनुषी शक्ति बताया। 2022 के लक्ष्य को पाने के लिए हमें ज्ञान, लोकतंत्र, प्राकृतिक संसाधन, कृषि, महिला सशक्तिकरण, युवा शक्ति और सांस्कृतिक धरोहर पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

इन सभी क्षेत्रों में विकास जरूरी है, मगर मैं अपनी तरफ से स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के मुद्दे पर नई सोच और नागरिक घोषणा-पत्र पर जोर दूंगा। सबसे पहले शिक्षा की बात करें तो आजादी के सात दशक गुजर गए, लेकिन साक्षरता का लक्ष्य अब तक हासिल नहीं हो पाया है। इसे हासिल करने के लिए तत्काल उपाय करने की जरूरत है। इस क्षेत्र में महज आंकड़ों से कुछ हासिल नहीं होगा बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता आवश्यक है। हमारी सरकार की ओर से 20 उम्दा संस्थानों की स्थापना का लक्ष्य इस दिशा में बढ़ाया गया, एक सही कदम है। इसमे यह ध्यान रखने की जरूरत है कि ये संस्थान स्वायत्त हों और नौकरशाही की बाधाओं से मुक्त हों।

मैं कहना चाहूंगा, हर स्तर पर आधिकारिक हस्तक्षेप कम होना चाहिए। स्कूलों को बहुमुखी विकास पर ध्यान देना चाहिए। यदि किसी की आधिकारिक निगरानी की जरूरत भी है तो उनकी, जो शिक्षा को उद्योग समझते हैं और दाखिले के लिए डोनेशन का चक्र चलाते हैं। शिक्षा देने के लिए भाषा, पाठ्यक्रम आदि का चयन पूरी तरह से संस्थानों के ऊपर छोड़ देना चाहिए। आइआइटी और आइआइएम की सफलता की कहानियों पर गौर करते हुए नीतिगत रूप से इनके समकक्ष संस्थानों की स्थापना की जाए। शिक्षा मूल्यों पर आधारित हो न कि केवल पैसे कमाने का जरिया।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सूत्र वाक्य सबके लिए स्वास्थ्य होना चाहिए। खासकर गरीबों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। हमने विगत वर्षों में अपनी प्राचीन व पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की घोर अनदेखी की है और उसके स्थान पर आयातित आधुनिक चिकित्सा के ज्ञान को बढ़ावा दिया जो कि सबके लिए स्वास्थ्य के लक्ष्य को पूरा करने में विफल है, यहां तक कि विकसित देशों में भी। दिनोदिन बढ़ते खर्च के बावजूद यह कारगर साबित नहीं हो रहा। हमे अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा और हमारी समग्र चिकित्सा पद्धति को अपनाना होगा, जो कि मनुष्य के सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक और आध्यात्मिक विकास पर भी जोर देती है। हमे अपनी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा को चिकित्सा तंत्र में शामिल करना होगा और चिकित्सा समुदाय को इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जारी फंडिंग को और अधिक बढ़ाने की जरूरत है और यह सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है कि वह सबकी पहुंच में हो। सरकार की ओर से हाल में आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों को कम करने की दिशा में किए गए प्रयास, सही दिशा में की गई एक कारगर पहल है।

जहां तक पर्यावरण का सवाल है, यह अब केवल चिंता या अभियान की बात नहीं रह गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी मौजूदा हालात की गंभीरता की ओर इशारा करते हुए देशवासियों से पर्यावरण की रक्षा करने की अपील की है। उनके अनुसार हमारे लिए पर्यावरण की रक्षा आस्था से जुड़ा मुद्दा है। मुझे लगता है यह एक पक्ष है, लेकिन महज आस्था और पवित्रता की नीयत रखने भर से ही हमारा कार्य संपन्न नहीं होगा बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक को इस दिशा में अपना सहयोग करना होगा और तब जाकर इस सामूहिक प्रयास से ही हम 2022 तक हरित भारत के लक्ष्य को पा सकेंगे।

मैं समझता हूं कि हर राष्ट्र के लिए भाग्योदय का अवसर आता है, जब वह ऊंचाइयों की ओर बढ़ता है। भारत के लिए यह सर्वथा उपयुक्त समय है। देश एक मजबूत प्रधानमंत्री के हाथों में है और हम सबको मिलकर उनका सहयोग करना होगा, तभी हम अपने सपनों के भारत को साकार कर सकेंगे।