Dr Harsh Vardhan visits European Spallation Source


Science & Technology Minister Dr Harsh Vardhan visited the upcoming European Spallation Source (ESS). The facility is now known as European Research Infrastructure Consortium (ERIC). It was created by the European Commission in 2009.


Lund, Sweden – Science & Technology Minister Dr Harsh Vardhan visited the upcoming European Spallation Source (ESS). The facility is now known as European Research Infrastructure Consortium (ERIC). It was created by the European Commission in 2009.

लुन्ड(स्वीडन) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने विदेश यात्रा के दौरान स्वीडन के यूरोपियन स्पैलेशन सोर्स’ (ईएसएस) का दौरा किया। यह एक परमाणु संयंत्र है। जो अभी निर्माणाधीन है। यह अब यूरोपियन रिसर्च इंफ्रास्टक्चर कंसोर्टियम (ईआरआईसी) के नाम से जाना जाता है। इसकी स्थापना 2009 में यूरोपियन कमीशन की ओर से की गई है।

ESS has 13 member states from Europe and is expected to be fully operational by 2023. The facility has provision for researchers from other countries to participate and data generated would be with a single repository in specific format, which would be in open domain available to research community.

ईएसएस के 13 सदस्य यूरोप से हैं। इस संयंत्र को 2023 में चालू होने की उम्मीद है। इसमें दूसरे देश के शोधकर्ताओं के हिस्सा लेने की व्यवस्था की गई है। यहां तक कि उन्हें एक खास फॉर्मेंट में डाटा रखने की सुविधा प्रदान की गई है। जो अनुसंधान क्षेत्र के लिए उपलब्ध होगा।  

The facility is a neutron source and can be compared with a giant microscope, enabling the structure and function of many types of new materials to be studied.  As compared to similar facilities   around the world, the intensity of the neutron stream at ESS will be up to much more powerful.  

ईएसएस न्यूट्रॉन का स्त्रोत है। इसकी तुलना एक विशाल माइक्रोस्कोप की जा सकती है। इस संयंत्र में संरचना एवं कार्य को सक्षम बनाने और नई सामग्री के साथ अध्ययन की आपार संभावनाएं हैं। ईएसएस स्तर के दुनिया में जितने भी संयंत्र हैं। उनमें न्यूट्रॉन स्ट्रीम की तीव्रता के मामले में ईएसएस काफी शक्तिशाली होगा।