स्वयं से सेवक बनने का सफर

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, भू-विज्ञान एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन का सार्वजनिक जीवन उपलब्धियों भरा रहा है। अपने अथक परिश्रम और समर्पण के बल पर उन्होंने जिस क्षेत्र में भी कदम रखा, वहां अपनी कुशलता और सामर्थ्य की अमिट छाप छोड़ी। पेशे से ईएनटी सर्जन डॉ. वर्धन का 1993 में सार्वजनिक जीवन में पदार्पण हुआ, जब वे पूर्वी दिल्ली की कृष्ण नगर विधानसभा सीट से चुने गए। यहीं से उनके उज्ज्वल चुनावी राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। वे उसके बाद से लगातार 1998, 2003, 2008 और 2013 में विधानसभा के लिए चुने गए और 2014 में चांदनी चौक संसदीय क्षेत्र से लोकसभा पहुंचे।

डॉ. वर्धन भारतीय राजनीति में एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने जिस किसी भी विभाग का जिम्मा संभाला, वहां अपनी अद्वितीय सोच, लगन और समर्पण से काया पलट कर दिया। उनके अथक कार्यों की तरह ही अनगिन उपलब्धियां भी हैं, फिर चाहें वह स्वास्थ्य का क्षेत्र हो या फिर शिक्षा, विधि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व पर्यावरण का। पोलियो को भारत के उज्जवल भविष्य के लिए गंभीर खतरा मानते हुए डॉ. वर्धन ने पूरे देश को पोलियो मुक्त करने का एक असंभव-सा सपना देखा और उसे साकार करने के लिए देशव्यापी जागरूकता अभियान से सभी को जोड़ा। उनकी निष्ठा, समर्पण, लगन के साथ ही देश और देशवासियों की सेवा के लिए कुछ भी कर गुजरने के उनके जुझारूपन के कारण ही देश 2012 में पोलियो मुक्त हो पाया। इसके साथ ही उन्होंने तंबाकू और नशीली दवाओं के खिलाफ आंदोलन छेड़ा और कई कानून बनाने में अहम भूमिका निभाई। मसलन, दिल्ली धूम्रपान निषेध कानून जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को ऐसा ही कानून बनाकर लागू करने को कहा था। बाद में 12 राज्यों ने ऐसा किया भी। उन्होंने पहली बार रेशनल ड्रग पॉलिसी लागू की, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिल्ली मॉडल का नाम दिया और कई देशों ने इसे अपनाया।

अद्वितीय अभिलेख

केंद्रीय मंत्री के तौर पर वर्ष 2014 से उन्होंने अपनी कार्यशैली से उपलब्धियों के एक के बाद एक नए कीर्तिमान गढ़े। देश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री के तौर पर डॉ. हर्ष वर्धन ने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक नए विचार, तकनीकी व प्रक्रिया विकसित करें ताकि देश के सामान्य नागरिकों का जीवन और अधिक सरल और सुगम बन पाए। वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ाने के मकसद से उन्होंने मंत्रालय के अंतर्गत देशभर की प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों का दौरा किया। मेक इन इंडिया कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध डॉ. वर्धन अनुसंधान एवं विकास के लिए मजबूत आधार तैयार करने और उद्योग व शोध संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं। वहीं देश के पर्यावरण मंत्री के रूप में वे स्वच्छ पर्यावरण व धरती के संरक्षण के लिए देशव्यापी जागरूकता मुहिम का बीज बोने के साथ ही पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों की नहीं, बल्कि देश के सभी लोगों की जिम्मेदारी है, का संदेश देने में सफल रहे हैं।

डॉ. हर्ष वर्धन को लोग प्यार से डॉक्टर साहब पुकारते हैं। वे अपने निजी जीवन में अपनी सरलता व सादगी के लिए जाने जाते हैं, वहीं कार्यस्थल में सूक्ष्मतम स्तर तक पारदर्शिता के पक्षधर हैं। प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि वे राजनीति में एक महान उद्देश्य के साथ आए हैं ताकि वे अपने चिकित्सा के अनुभव के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की सेवा कर सकें।

प्रारंभिक जीवन

स्वर्गीय ओम प्रकाश गोयल और स्नेहलता की दूसरी संतान डॉ. वर्धन का जन्म 13 दिसंबर 1954 को हुआ था। उनके एक छोटा भाई और बड़ी बहन हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा दरियागंज के एंग्लो-संस्कृत विक्टोरिया जुबली सीनियर सेकेंडरी स्कूल से हुई, जो कि उत्तर भारत के सबसे पुराने स्कूलों में से है। इसकी स्थापना 1869 में हुई थी। बाद में उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर से एमबीबीएस और एमएस की डिग्री हासिल कर ईएनटी सर्जन बने।

आगरा में एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के दौरान अपने सहपाठियों के साथ डॉ. हर्ष वर्धन (दाएं से दूसरे)।

उन्होंने दिल्ली आकर ईएनटी सर्जन के रूप में अपनी प्रैक्टिस शुरू की। डॉ. वर्धन 1984 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के दिल्ली चैप्टर में शामिल हुए और मेडिकल बिरादरी की एकजुटता के लिए अथक परिश्रम किया। उन्होंने दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन में भी विभिन्न पदों को सुशोभित किया। यहीं से उनकी नेतृत्व क्षमता के संकेत मिलने लगे थे। भारतीय जनता पार्टी के भीतर डॉक्टर्स सेल के गठन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और विभिन्न राज्यों में इसकी शाखाएं स्थापित की।

स्वयं से पहले सेवा

तमाम असाधारण उपलब्धियों के बावजूद डॉ. हर्ष वर्धन की पहचान हमेशा से एक सरल, सिद्धांतवादी और विनम्र व्यक्ति की रही है। बचपन से ही आरएसएस के स्वयंसेवक रहे डॉ. वर्धन ने हमेशा ही स्वयं को कम सेवा को ज्यादा तरजीह दी। भारतीय राजनीति को करीब से जानने वाले इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि भारत को पोलियो मुक्त करने के अपने संकल्प को उन्होंने किस जुनून के साथ पूरा किया और देशभर में पोलियो के खिलाफ जागरूकता के लिए कैसे जन आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने सबसे पहले दिल्ली को पोलियो मुक्त करने का अभियान चलाया था। उस समय अकेले दिल्ली में देशभर के कुल पोलियो मरीजों का दस प्रतिशत हिस्सा था।

प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी पोलियो उन्मूल अभियान के दौरान एक बच्चे को पोलियो की खुराक पिलाते हुए। साथ में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन बच्चे को गोद में लिए हुए।

2 अक्तूबर, 1994 को महात्मा गांधी की जयंती पर एक दिन में कुल 1.2 मिलियन बच्चों को पोलियो की खुराक दी गई। इससे पहले भारत भर में इतने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान नहीं चलाया गया था। पोलियो के खिलाफ इस दो बूंद अभियान में स्कूली बच्चों ने जहां पोलियो सैनिक की भूमिका निभाई, वहीं इसमें चार सौ से अधिक गैर सरकारी संस्थाओं, आरएसएस और रोटरी इंटरनेशनल के हजारों सदस्यों के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के हजारों की संख्या में लोग इस अभियान में शामिल हुए और इसे सफल बनाया।

लेकिन डॉ. वर्धन की नजरें इससे भी बड़े लक्ष्य पर थी। उनका सपना था भारत को सदा के लिए इस महामारी के चंगुल से मुक्त कराना। और उनका यह सपना तभी पूरा हो सकता था, जब देश भर में बड़े पैमाने पर इस अभियान को एक साथ लागू किया जाता। शुरुआत में तो इस अभियान की सफलता को लेकर देश और विदेशों के विशेषज्ञों के मन में भी संदेह उठा कि आखिर इस बड़ी आबादी के बीच इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी और स्वयंसेवियों की फौज कैसे खड़ी की जाएगी।

स्मरण रहे कि यह दौर इंटरनेट और मोबाइल फोन के पूर्व का दौर था। तमाम चुनौतियों के बावजूद डॉक्टर वर्धन ने हार नहीं मानी और उन्होंने देशभर में घूम-घूमकर राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों से मुलाकात की और उनसे इस अभियान को सफल बनाने के लिए सहयोग की गुजारिश की। आज इस अभियान के छह साल गुजर गए और सौभाग्य से देश में एक भी पोलियो का मरीज सामने नहीं आया। यह हम सबके लिए सुखद आश्चर्य है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन तीन साल पहले ही भारत को पोलियो मुक्त राष्ट्र घोषित कर चुका है।

तंबाकू के खिलाफ संघर्ष

व्यक्तिगत जीवन में स्वास्थ्य और नैतिकता को प्राथमिकता देने वाले डॉ. हर्ष वर्धन सार्वजनिक जीवन में भी ऐसी ही अपेक्षा रखते हैं। ईएनटी सर्जन के रूप में उन्होंने अनगिन कैंसर से जूझते मरीजों और उनके परिवारों बिखरते देखा। इन घटनाओं से द्रवित डॉ. साहब ने तंबाकू के खिलाफ संघर्ष शुरू किया। उन्होंने देश में पहली बार तंबाकू विरोधी कानून की परिकल्पना की। तंबाकू लॉबी के जबर्दस्त विरोध के बावजूद वर्ष 1997 में उनके साहसिक नेतृत्व में दिल्ली में धूम्रपान पर अंकुश लगाने और धूम्रपान न करने वालों के स्वास्थ्य की रक्षा के मकसद से कानून पारित किया गया।

वह डॉ. हर्ष वर्धन थे जिन्होंने भारत में तम्बाकू विरोधी कानून लागू करने का नेतृत्व किया था

इस कदम का देश के करोड़ों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित लोगों ने स्वागत किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस दिशा में पहल करते हुए सभी राज्यों और केंद्र सरकार से इसे जनहित में अपनाने को कहा। जल्द ही सभी राज्य दिल्ली के नक्शेकदम पर चल पड़े और 2002 में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान के विरोध में केंद्र का कानून पारित हुआ। तंबाकू के खिलाफ डॉ. वर्धन आज भी संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने तंबाकू नियंत्रण पर कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लिया।

ब्राजील के रियो डी जेनेरो में डॉ. हर्ष वर्धन डब्ल्यूएचओ के डीजी कमेंडेशन मेडल अवार्ड ग्रहण करते हुए।

डॉ. वर्धन का मानना है कि समाज सिर्फ सतही बदलावों से आधुनिक नहीं बनता। उनके अनुसार प्रगति और आधुनिकता का अर्थ एक ऐसी जीवनशैली को अपनाना है, जिससे समग्र परिपक्वता और दृष्टि प्रतिबिंबित हो। जब तक कि सभी के लिए स्वास्थ्य, सबके लिए प्राथमिक शिक्षा और पर्यावरण की रक्षा जैसे विषय महज नारे बने रहेंगे। आप तब तक खुद को महाशक्ति नहीं कह सकते।

समाज के लिए उनके असाधारण योगदान के लिए ही उन्हें डीजी कमेंडेशन मेडल से 1998 में रियो डी जेनेरो में सम्मानित किया गया। इससे पहले यह सम्मान अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और मशहूर फुटबॉलर पेले को मिला था। जनवरी 2001 में प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें रोटरी इंटरनेशनल के पोलियो ईरेडिकेशन चैंपियन अवार्ड से नवाजा। डॉ. वर्धन यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे। उनसे पहले इस पुरस्कार से ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री जॉन मेजर, अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान सहित कई अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व नवाजे जा चुके हैं। समारोह में दुनियाभर से आए मेहमानों के समक्ष तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. वर्धन को स्वास्थ्य वर्धन कहकर संबोधित किया और उन्हें रोटरी इंटरनेशनल के पोलियो ईरेडिकेशन चैंपियन अवार्ड से सम्मानित किया था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने स्वास्थ्य वर्धन को रोटरी इंटरनेशनल के पोलियो ईरेडिकेशन चैंपियन अवार्ड से सम्मानित करते हुए।

लोकप्रिय

डॉ. वर्धन देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में हैं, जिन्हें केवल अपने दल में ही नहीं, बल्कि अन्य दलों से भी समान आदर और सम्मान प्राप्त है। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने एक अंतर्राष्ट्रीय समारोह में कहा था- “यदि मुझे भारत में आउटस्टैंडिंग अवार्ड के लिए किसी एक नेता को चुनना हो तो मेरी पहली पसंद डॉ. हर्ष वर्धन होंगे। ”

डॉ. हर्ष वर्धन रोटरी इंटरनेशनल की ओर से दो बार पॉल हैरिस फेलोशिप से नवाजे जा चुके हैं। 1996 में इटली के मिलान स्थित द इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलीपैथी ने उन्हें फेलो के लिए नामित किया था। वर्ष 1995 में लायंस इंटरनेशनल के तत्कालीन अध्यक्ष श्री सी. पीनो ग्रिमाल्डी ने उन्हें लायंस इंटरनेशनल सर्विस अवार्ड से सम्मानित किया था। 1994 में डॉ. वर्धन को आईएमए प्रेसिडेंट स्पेशल अवार्ड ऑफ एप्रेसिएशन से नवाजा गया। एक मशहूर चिकित्सक की हैसियत से उन्हें लगातार 1995 और 1996 में सर्वोच्च उपलब्धियों के लिए आईएमए के विशेष पुरस्कार से नवाजा गया। 1 जुलाई 2002 को डॉक्टर्स डे के दिन इंडियन मेडिकल एसोसिेएशन ने उन्हें बीते दशक का आदर्श मेडिकल कैंपेनर मानते हुए उन्हें डॉक्टर ऑफ द लास्ट डिकेड (स्वास्थ्य रत्न) से सम्मानित किया। एसोसिएशन ने उन्हें बीते दशक का आदर्श मेडिकल कैंपेनर माना।

सामाजिक कार्यकर्ता

देश और विदेश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा डॉ. वर्धन को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। महाराजा अग्रसेन फोरम ने 1994 में उन्हें अग्रवाल रत्न अवार्ड से नवाजा। वहीं जैन महासभा ने 1996 में अहिंसा सम्मान से और 1996 में ही असाधारण उपब्धियों के लिए उन्हें तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा सेवा श्री सम्मान से नवाजा गया। अखिल भारतीय बुद्धिजीवी सम्मेलन ने उन्हें दिल्ली रत्न अवार्ड से सम्मानित किया। 2001 में आचार्य खेमचंद सुमन सेवा समिति ने उन्हें आचार्य सुमन श्री सम्मान दिया। रोटरी क्लब ऑफ दिल्ली ने गुजरात में आए भयंकर भूकंप के दौरान पीड़ितों की सेवा और अप्रतिम समर्पण के लिए उन्हें वोकेशनल एक्सिलेंस अवार्ड के लिए चुना। इंडिया इंटरनेशनल फ्रेंडशिप सोसायटी की ओर से समाज के लिए अतुलनीय सेवाओं के लिए तमिलनाडु के राज्यपाल डॉ. भीष्म नारायण सिंह ने डॉ. वर्धन को सर्टिफिकेट ऑफ एक्सिलेंस प्रदान किया। मुंबई में 2002 में आयोजित पोलियो पल्स इंटरनेशनल प्रेसिडेंशियल समिट में पोलियो मुक्त भारत बनाने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने 1999 में पंजाब एंड सिंध बैंक की ओर से चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए ह्यूमन केयर अवार्ड ऑफ द मिलेनियम से उन्हें नवाजा।

द इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटेड मेडिकल साइंसेज, वाराणसी ने उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ एक्सिलेंस प्रदान किया। 1996 में पर्यावरण के लिए किए गए उनके कार्यों के लिए वर्ल्ड एनवायरन्मेंट कांग्रेस में नेशनल एनवायरन्मेंट सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया। 1996 में उन्हें अखिल भारतीय हिन्दी सम्मेलन की ओर से डॉ. गंगा शरण सिंह राष्ट्रीय सम्मान भी मिला।

बड़ी सोच का आदमी

डॉ. वर्धन को विश्व स्वास्थ्य संगठन के एसेंशियल ड्रग प्रोग्राम के क्रियान्वयन में महती भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। इसने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सरकार के रवैए में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया। कार्यक्रम के तहत अति आवश्यक दवाओं के लिए बजट में अधिकतम प्रावधान सुनिश्चित किया गया। डॉ. वर्धन की इस पहल को दिल्ली मॉडल का नाम दिया गया और विश्व के कई देशों में इसे अपनाया गया। भारत में करीब दस से अधिक राज्यों ने इसका अनुकरण किया। द दिल्ली सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ रेशनल यूज ऑफ ड्रग्स आंदोलन के जनक भी डॉ. वर्धन रहे हैं और आज भी इसकी प्रगति की जानकारी लेते हैं।

नशा विरोधी अभियान के तहत भी उन्होंने सड़कों पर उतरकर रैलियां कीं और लोगों को जागरूक किया। इसके अलावा भी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर वे काम करते रहे हैं। उनकी पहल पर ही दिल्ली का मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज देश का पहला ऐसा कॉलेज बना, जहां व्यावसायिक और परिवेश संबंधी स्वास्थ्य (ओक्यूपेशनल एंड एन्वायरन्मेंटल हेल्थ) का विभाग बना।

नशा मुक्ति के अभियान के दौरान विशाल रैली की अगुवाई करते डॉ. वर्धन।

दिल्ली के निम्न और मध्यम आय वर्गों के लिए उन्होंने मातृ सुरक्षा योजना की शुरुआत की ताकि प्रसूता और शिशु की उचित देखभाल हो सके। यही नहीं, उनके कुशल नेतृत्व में ही कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम, मोतियाबिंद मुक्त दिल्ली, श्रवण शक्ति अभियान चलाया गया। उनके प्रशासन ने स्वस्थ शहर परियोजना, हेपेटाइटिस बी टीकाकारण कार्यक्रम और आयुर्वेद का आधुनिक रूप में प्रचार-प्रसार के लिए भी अभियान चलाया। दिल्ली पिजियोथैरेपी एंड ओक्यूपेशनल थेरेपी एक्ट और दिल्ली आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन एक्ट पारित कराने में भी आपकी अहम भूमिका रही।

विशेषज्ञता

डॉ. वर्धन की एक समर्पित चिकित्सक के रूप में पहचान रही है और उन्होंने हमेशा ही चिकित्सा को एक मिशन के रूप में लिया। उनके लिए चिकित्सा पेशा नहीं, वरन महान ईश्वरीय कार्य है। निः स्वार्थ भाव से सर्वजन हिताय उनकी सेवाओं और आंदोलनों ने उन्हें अपार प्रसिद्धि दिलाई। उनकी प्रसिद्धि का आलम यह है कि दुनिया भर के विशेषज्ञ उनसे सलाह-मशविरा करते हैं। विदेशों में चिकित्सकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संबोधित करने का नियमित तौर पर उन्हें आमंत्रण मिलता रहता है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दक्षिण एशिया कार्यालय के लिए सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएं दी। वे पहले भारतीय हैं, जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिष्ठित निकाय के विशेषज्ञों के रणनीतिक सलाहकार दल के लिए नामित किया गया।

दिल्ली स्टेट मेडिकल कांफ्रेंस के मेडिकॉन-94 में डॉ. हर्ष वर्धन अन्य पदाधिकारियों के साथ।

जहां तक सवाल चिकित्सा बिरादरी का है तो डॉ. हर्ष वर्धन हमेशा अगुवा रहे। वे आईएमए और डीएमए जैसी संस्थाओं में विभिन्न पदों पर रहे। इसके अलावा वे ग्लोबल टेक्निकल कंसल्टेटिव ग्रुप और टेक्निकल कंसल्टेटिव ग्रुप ऑफ साउथ ईस्ट एशिया रिजन फॉर पोलियो ईरेडिकेशन में भी सेवाएं दी।

डॉ. वर्धन विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के सदस्य रहे हैं। न केवल मेडिकल बल्कि सामाजिक- सांस्कृतिक क्षेत्र के विभिन्न संगठनों से जुड़े रहे हैं। वे इंटरनेशनल मेडिकल पार्लियामेंटेरियन्स ऑर्गनाइजेशन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, मानवाधिकार व अतंर्राष्ट्रीय मामलों की परिषद, पंचनाद रिसर्च इंस्टीट्यूट, द आईएमए अकादमी ऑफ मेडिकल स्पेशलिस्ट, द एसोसिएशन ऑफ ओटोलैरिंगोलोजिस्ट, द ऑल इंडिया राइनोलॉजी सोसायटी, द जेम्स एसोसिएशन और दिल्ली सोसायटी फॉर प्रोमोशन ऑफ रेशनल यूज ऑफ ड्रग्स के आजीवन सदस्य हैं। इसके साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण को इच्छुक नेताओं के लिए देश के पहले बहुदलीय मंच ग्रीन फोरम के संस्थापकों में हैं।

पत्र-पत्रिकाओं में योगदान

डॉ. वर्धन अब तक विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने कई शोध-पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। उन्होंने विश्व के कई मेडिकल जर्नल मे लिखा है और दुनिया के विभिन्न देशों का दौरा किया है। वे दूरदर्शन भारती चैनल के स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों के विशेषज्ञ सलाहकार समिति के वरिष्ठ सदस्य भी हैं।

पर्यावरण, स्वास्थ्य, चिकित्सा नैतिकता और प्रगतिशील मुद्दों पर लगातार उनके आलेख राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। डॉ. वर्धन के आलेख हिन्दुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, पंजाब केसरी, ऑर्गनाइजर, डीएनए, बिजनेस स्टैंडर्ड, पांचजन्य और अन्य पत्र-पत्रिकाओं में छप चुके हैं। क्षेत्रीय व भाषाई अखबारों में भी उनके आलेख प्रकाशित होते रहे हैं।

वर्धन परिवार

डॉ. वर्धन अपनी सहधर्मिणी नूतनजी और बच्चे सचिन, इनाक्षी और मयंक के साथ (क्रमशः बाएं से दाएं खड़े)।

डॉ. वर्धन की सहधर्मिणी व हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन में विशेषज्ञ नूतन जी ने गृहस्थी की जिम्मेवारी संभाली। उनके दो बेटे हैं, जिनमें बड़ा डॉ. मयंक भारत ने एमबीबीएस किया और हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। उनके छोटे बेटे सचिन ने मेलबोर्न के मोनाह यूनिवर्सिटी से एकाउंटेंसी और फाइनेंस में डिग्री हासिल की और वे अब सीपीए हैं। बेटी इनाक्षी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी. कॉम (ऑनर्स) करने के बाद एमबीए किया और अब दिल्ली विश्वविद्यालय में मैनेजमेंट की प्राध्यापक हैं। धूम्रपान सहित किसी भी प्रकार की लत से कोसों दूर डॉ. वर्धन का मानना है- रोगों से रहना है दूर तो योग और व्यायाम करो जरूर । बच्चों में शुरू से ही इसकी आदत पड़ जाए और वे स्वास्थ्य औऱ चरित्र के प्रति बचपन से ही सचेत रहें, इसी उद्देश्य से दिल्ली के शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने खेल, योग और नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंग बना दिया था।

डॉ. वर्धन की शख्सियत का एक पहलू यह भी है कि वह इंसानियत और मानवता को आध्यात्म का चरम बिंदु मानते हैं और यही वजह है कि उनके प्रशंसक किसी एक वर्ग या धर्म विशेष से नहीं हैं। सभी धर्म और पंथ के लोग डॉ. वर्धन को एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं, जो वास्तव में सभी समुदाय के बीच समन्वय और भाईचारे का पैरोकार है। वे भारत की विविधता में एकता को न केवल हृदय की गहराइयों से महसूसते हैं बल्कि उसकी विविधता को मानवता की बड़ी धरोहर मानते हुए उसे अक्षुण्ण रखने के लिए सतत् प्रयत्नशील भी रहते हैं। पूरी मानवता के लिए भीषण त्रासदी बन चुके पोलियो को देश से मिटाने के लिए उन्होंने देशभर के मस्जिदों में जाकर इमामों के साथ बैठकें कीं और पोलियो टीकाकरण अभियान को गरीब मुस्लिम समुदायों के बीच भी सफल करने के लिए अथक प्रयास किया। मुस्लिम समुदाय के बीच उनकी सेवाओं के लिए ही उन्हें नई दिल्ली की गालिब अकादमी ने अप्रैल, 2008 बेस्ट प्रोफेशनल अवार्ड से सम्मानित किया था।

सर्वधर्म समभावः डॉ. हर्ष वर्धन मुस्लिम सम्मेलन में शिरकत करते हुए।

जून 2008 में उन्होंने नई दिल्ली के कैथलिक चर्च के साथ मिलकर प्लास्टिक थैलियों के खिलाफ ग्रीन शॉपर आंदोलन चलाया था। इसके जरिए पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के निर्माण और उत्पादन के लिए एक माहौल तैयार हुआ और उससे गरीबों को रोजगार मिले व देशभर में स्वयं सहायता गुटों का एक संजाल तैयार हुआ।

हरित क्रांति के पुरोधा

जून, 2007 में डॉ. वर्धन ने दिल्ली में पर्यावरण आंदोलन से जुड़े नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया और पर्यावरण संरक्षण की अगुवाई करने का संकल्प लिया। जुलाई, 2008 में जब वे भारतीय मूल के अमरीकी चिकित्सकों को संबोधित करने अमरीका गए तो उन्हें वहां के चिकित्सक समुदाय ने भविष्य के नेता के तौर पर सम्मानित किया। उनके सम्मान में लास वेगास के मेयर श्री ऑस्कर गुडमैन ने उन्हें शहर की चाभी थमाई। दिसबंर, 2004 में डॉ. वर्धन ने पोलियो उन्मूलन के आंदोलन से जुड़े अपने अनुभवों को एक पुस्तक का रूप दिया। पुस्तक अंग्रेजी में ए टेल ऑफ टू ड्रॉप्स और हिंदी में कहानी दो बूंदों की के रूप में आई। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री मोहन भागवत, श्रीमती सुषमा स्वराज और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण एशियाई क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सामली प्लीयानबांगचांग की मौजूदगी में डॉ. वर्धन को स्वास्थ्य वर्धन कहकर संबोधित किया।

एक योग्य संगठक

दिल्ली में भारी जीत के बाद आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ डॉ. हर्ष वर्धन और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी।

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराने का श्रेय यदि किसी व्यक्ति को जाता है तो वह हैं डॉ. हर्ष वर्धन। चार बार दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी संभालने वाले डॉ. वर्धन ने यह साबित कर दिया कि एक अच्छा पेशेवर एक कुशल संगठक भी हो सकता है। पूर्व में वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्ष 2003 में वे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोनीत किए गए और उन्होंने जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक पार्टी को संगठित करने के लिए कई बदलाव किए। यह उनके कुशल नेतृत्व का ही नतीजा था कि कार्यकर्ता नई ऊर्जा और संकल्प के साथ एक बार फिर जुटे और भाजपा जीत के रथ पर सवार हुई। अप्रैल 2007 में पार्टी ने नगर निगम पर कब्जा जमाया और 2008 में दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड पर काबिज हुई। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से डॉ. हर्ष वर्धन को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाकर चुनाव लड़ा गया था, जिसमें पार्टी को अधिकतम सीटें हासिल हुई थीं। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी सात संसदीय सीटें जीतीं।

राजनीति से अलग डॉ. वर्धन हमेशा से ही जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सिद्धांतों को प्रचारित-प्रसारित करते रहे हैं। डॉ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। वर्ष 2008 में पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह द्वारा डॉ. वर्धन को श्यामा प्रसाद मुखर्जी फाउंडेशन का सचिव बनाया गया। इसके तहत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन से जुड़े तीन महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर उन्हें काम करना था। पहला डॉ. मुखर्जी की कृतियों को एकत्र करना, दूसरा कोलकाता स्थित उनके निवास को स्मृति के रूप संरक्षित करना और तीसरा राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों पर शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना। डॉ. वर्धन हमेशा से ही भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ लड़ते रहे हैं। डॉ. वर्धन को नागरिक, उपभोक्ता, पर्यावरण समेत विभिन्न अधिकारों के संघर्ष के लिए जाना जाता रहा है।