मेरे सपनों की दिल्ली

देश का दिल कही जाने वाली दिल्ली में लघु भारत दिखता है, यदि यह कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि यहां सही मायने में देश की विविधता दिखाई पड़ती है। देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां आकर बसे हैं। एक तरह से दिल्ली विश्व के समक्ष देश का आईना है इसलिए एक राजनेता के तौर पर मेरा सपना दिल्ली को अतर्राष्ट्रीय शहर बनाने का है। मुझे दृढ़ विश्वास है कि तमाम विरोधाभासों और चुनौतियों के बावजूद दिल्ली को बदला जा सकता है। दिल्ली की कुछ समस्याएं तो अदूरदर्शिता और योजना की कमी का परिणाम हैं।

शासन

सभी सार्वजनिक सेवाएं अंकीकृत (डिजिटाइज्ड) और ऑन लाइन उपलब्ध हों ताकि मैन्यूअल इंटरफेस पर निर्भरता कम हो सके, खासकर जनोपयोगी सेवाओं में। इससे भ्रष्टाचार के सारे अवसर खत्म हो पाएंगे। राज्य को छह क्षेत्रों में बांटा जाएगा, हर क्षेत्र के अभिभावक एक मंत्री होंगे। विधायकों को उनके निर्वाचन-क्षेत्रों का अभिभावक मानते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी कि वे विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मिलकर नियमित रूप से लोगों की समस्याएं सुनें और उसका हल निकालें। राज्य को बेहतर प्रशासन देने के मकसद से छह हिस्सों में बांटा जाएगा और एक वरिष्ठ मंत्री को अभिभावक मंत्री बनाया जाएगा। वे विधानसभा स्तर पर हर तीन महीने में जन सुनवाई करेंगे और लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे।

कानून-व्यवस्था

राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था सीधे केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है, इसलिए दिल्ली की सरकार नागरिकों जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरक की भूमिका निभा सकती है। शहर के सभी अंधेरे इलाकों को चिन्हित कर वहां पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी मार्ग बिना लाइट के ना हो। सभी बड़े चौराहों, हाईवे और शॉपिंग व टूरिस्ट स्पॉट पर निगरानी के लिए सीसी टीवी कैमरे की व्यवस्था हो।  

पर्यावरण

स्वच्छ दिल्ली

दिल्ली देश की राजधानी है ऐसे में यह स्वाभाविक ही है कि यह किसी विश्व स्तरीय शहर की तरह साफ एवं स्वच्छ हो। यहां पर्यावरण क्षरण को रोकने और हवा की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए एक ग्रेडेड रिस्पॉन्स सिस्टम की व्यवस्था हो। धूल के कणों को हवा में फैलने से रोकने के लिए सभी सार्वजनिक स्थलों पर मशीन से सफाई की व्यवस्था की जाएगी।

अपशिष्ट निपटान प्रबंधन में आमूल बदलाव करना होगा। गड्ढ़ों में कूड़ा-कचरा फेंकने से तत्काल वायु प्रदूषण का खतरा होता है, वही कुछ समय बाद मिट्टी भी प्रदूषित हो जाती है। निजी भागीदारी से शहर के कूड़े का वैज्ञानिक ढंग से निपटान व वेस्ट को वेल्थ बनाने का प्रयास किया जाएगा।

प्लास्टिक के थैलों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर कपड़े व जूट के थैले के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। पूरे दिल्ली में पुराने पारंपरिक बल्बों के स्थान पर एलईडी बल्बों को लगाया जाएगा ताकि कार्बन उत्सर्जन कम हो सके और नगर निकायों के राजस्व में वृद्धि हो।

स्वास्थ्य सेवा  

बड़े अस्पतालों में पूर्ववत विशेष इलाज की सुविधा जारी रहेगी और सेवाओं को अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का बनाया जाएगा। वहीं, दिल्ली के आस-पास पांच किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले हर गांव में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोला जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के लिए पैथोलॉजिकल लैब स्थापित किए जाएंगे। बीमा कंपनियों के साथ मिलकर विशेष शिविरों का आयोजन कर सभी परिवारों की सूची तैयार करना तथा केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत उनका बीमा कराना। सरकारी बीमा के दायरे से बाहर रहे लोगों को उपयुक्त बीमा योजना लेने के लिए प्रेरित करना ताकि दिल्ली की पूरी आबादी बीमा योजना के अंतर्गत आ जाए।

शिक्षा

प्राथमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम नए तरीके से तैयार करते हुए बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही नैतिक मूल्य व देशभक्ति के पाठ पढ़ाए जाएंगे और पर्यावरण की रक्षा व संरक्षण के लिए उन्हें ग्रीन गुड डीड्स को दैनिक जीवन का अंग बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि पर्यावरण की रक्षा के लिए पूरी पीढ़ी बचपन से ही तैयार हो सके।  सभी सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में तब्दील किया जाएगा और संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल को सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक बच्चों को पढ़ने-लिखने का मौका मुहैया कराया जाएगा। यही नहीं, स्कूल के पाठ्यक्रम को सेवा व उद्योग क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप ढालेंगे। वहीं शिक्षकों को भी शिक्षण के लिए उपयोगी नए उपकरणों के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा तथा रोजगार परक शिक्षा के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ को शिक्षा क्षेत्र से जोड़े जाने की योजना हो।

इंटरनेट कनेक्टिविटी

मेरा मानना है कि भारत में बदलाव लाना है तो उसके गांवों पर ध्यान देना होगा। इसी तरह दिल्ली के आस-पास के गांवों को ब्राडबैंड की सुविधा से जोड़ा जाएगा, चाहे वे शहरी हों या ग्रामीण। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्रामीणों को सीमित सुविधा वाली यह सेवा निःशुल्क उपलब्ध हो। यही नहीं, गांवों में सेवा केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएं कम दर में हासिल हो सकें।   

सौर ऊर्जा

पारंपरिक ऊर्जा के स्रोतों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में सौर ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा का एक बेहतर विकल्प है। ईश्वर की कृपा से भारत की जलवायु सौर ऊर्जा उत्पादन के अनुकूल है। इसलिए दिल्ली को चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा से रोशन किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में सार्वजनिक स्थानों पर सोलर लाइटें लगाई जाएंगी। उसके बाद सरकारी इमारतों को सौर ऊर्जा के जरिए रौशन किया जाएगा। सौर ऊर्जा उत्पादन को भवन निर्माण की योजना का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि आवासीय हो या वाणिज्यक इमारतें उनके पास सौर ऊर्जा का पर्याप्त भंडार हो। धीरे-धीरे सभी इमारतों के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली स्थापित करना बाध्यतामूलक हो जाएगा।  

यातायात

एक मल्टी मॉडल पारगमन विकास की व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमे हर भीड़भाड़ वाले स्थान पर सार्वजनिक वाहन की उपलब्धता होगी। साथ ही एक पारगमन केंद्रित विकास पर जोर दिया जाएगा। श्रेणीबद्ध परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी, जहां बिना मोटर वाले परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि प्रदूषण की चुनौती से निपटा जा सके और वहां पैदल चलने वालों को भी असुविधा ना हो। हालांकि भारत ने 2030 तक ईंधन वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का लक्ष्य रखा है, लेकिन दिल्ली में चरणबद्ध तरीके से इसे पहले ही बदलने का प्रयास होगा।   

दिल्ली के भारी ट्रैफिक दबाव को कम करने का प्रयास

वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे परियोजना को जल्द संपन्न कराने के लिए केंद्र से करेंगे बातचीत ताकि दोनों तरफ के राज्यों के वाहनों को दिल्ली से होकर नहीं गुजरना पड़े। इससे जहां एक ओर भीड़-भाड़ कम होगी, वहीं वाहनों से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी। राजधानी ट्रैफिक दबाव से बच पाएगा।

पार्किंग

राजधानी दिल्ली में पार्किंग एक बड़ी समस्या है। निजी भागीदारी में बड़े शॉपिंग कॉम्पलेक्स और ऑफिस कॉम्पलेक्स में मल्टी लेवल पार्किंग की व्यवस्था। हर कहीं पार्किंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध। बड़े रिहायशी कॉम्पलेक्स और बिल्डिंग के प्लान में पार्किंग को शामिल किया जाना चाहिए।  

पैदल यात्रियों के अनुकूल दिल्ली

शहर की सड़कों में जिस तरह से वाहनों को प्राथमिकता मिलती है, उसी तरह पैदल चलने वालों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। जैसा किसी अन्य विश्वस्तरीय शहरों में होता है। एक डॉक्टर के तौर पर मैं चलने के फायदे से वाकिफ हूं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व भर में होने वाली मौतों के पीछे सबसे बड़ा कारण शारीरिक गतिविधियों का अभाव है। हम पैदल चलने वालों के लिए बाधाए हटाएंगे। सभी बड़ी सड़कों पर चलने वालों के लिए अलग से व्यवस्था होगी। बड़े शॉपिंग एरिया और ऐतिहासिक स्थलों को पूरी तरह से पैदल चलने वालों के अनुकूल बनाया जाएगा।

ट्रैफिक निगरानी व्यवस्था का डिजिटलीकरण

दिल्ली में ट्रैफिक निगरानी व्यवस्था का संपूर्ण डिजिटलीकरण होगा। उच्च क्षमता वाले कैमरे से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कड़ी नजर रखी जाएगी और नियम तोड़ने वालों के लिए  मशीन से स्वतः जुर्माना पर्चियां निगलेंगी। इससे मानव संसाधन पर निर्भरता कमेगी और भ्रष्टाचार की भी गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

पर्यटन और यमुना का पुनरोद्धार

यमुना दिल्ली की संस्कृति और इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। यही नहीं, हमारे धर्म ग्रंथों में भी गंगा को यमुना के समकक्ष स्थान प्राप्त है। लेकिन अफसोस, आज यह देश की सबसे प्रदूषित नदी है या यूं कहें, हमने अपनी लापरवाही से इसे नाले में तब्दील कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह से गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए साबरमती नदी का पुनरोद्धार किया और उसके किनारों का सौंदर्यीकरण कर उसका कायापलट किया, यमुना के लिए भी मेरी ऐसी ही योजना है। गैर सरकारी सामाजिक संगठनों के सहयोग से यमुना के पुनरोद्धार के लिए एक अभियान चलाए जाने की जरूरत है, जिसमे जनता की ओर से भी भागीदारी हो। एक बार नदी का पुनरोद्धार संपन्न हो जाए तो उसकी देखभाल की जिम्मेदारी विशेष रूप से गठित एजेंसी को सौंप दी जाए। उस एजेंसी के जिम्मे देखभाल व सौंदर्यीकरण के साथ ही नदी पर्यटन को बढ़ावा देने का कार्य भी होगा। अन्य देशों की तरह ही हमे पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ऐतिहासिक व धरोहर स्थलों पर सालाना उत्सव आयोजित करने की आवश्यकता है, जिसमे लाइट व साउंड शो के जरिए पर्यटकों को विभिन्न ऐतिहासिक तथ्यों से रूबरू कराया जाएगा और सैलानियों को भारतीय संस्कृति, स्थापत्य कला व शिल्प के बारे में विस्तार से जानकारी मिल पाएगी।