एक समर्पित कर्मयोगी

डॉ. हर्ष वर्धन की पहचान केवल जन नेता के तौर पर ही नहीं, बल्कि कई जन आंदोलनों के अगुवा के रूप में भी है। वे जो कुछ भी करते हैं, उनके उत्साह, ऊर्जा और समर्पण से वह बेहतरीन में तब्दील हो जाता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। केंद्र व राजधानी दिल्ली में मंत्री के रूप में उन्होंने जो कुछ भी किया है, वह सर्वविदित है। व्यक्तिगत जीवन में अत्यंत सरल और कार्यस्थल में सूक्ष्मतम स्तर तक पारदर्शिता के समर्थक डॉ. वर्धन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की (आरएसएस) विचारधारा को अपने जीवन का मंत्र बनाया और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद से प्रेरणा ग्रहण की। वे हमेशा ही गरीबों और वंचितों की सेवा को समर्पित रहे हैं। उनके लिए सेवक हमेशा स्वयं से पहले आता है। राष्ट्रवाद उनकी रगों में है और वे निरंतर देश और देशवासियों के उत्थान के लिए प्रयत्नशील हैं। उनकी पहचान यूं ही एक महान व अनूठे विचारों वाली शख्सियत की नहीं है। उन्होंने देश को पोलियो मुक्त करने का संकल्प लिया और उसे अपने लगन और अथक परिश्रम से पूरा भी किया। डॉ. हर्ष वर्धन ने नई पीढ़ी को इस घातक बीमारी से बचाने के लिए यह सुनिश्चित किया कि पोलियो से रक्षा का संदेश देश के कोने-कोने तक पहुंचे और इसके लिए बड़े पैमाने पर जन आंदोलन चलाकर जन भागीदारी को सुनिश्चित की।

डॉ. वर्धन एक बार फिर अपनी अथक ऊर्जा के साथ पर्यावरण की रक्षा और उसके संरक्षण के लिए देशव्यापी एक विशाल आंदोलन खड़ा करने में जुटे हैं। वह चाहते हैं कि इस दिशा में देश का हर नागरिक सहयोग करे और प्रकृति मां की रक्षा के लिए वह प्रतिदिन कम-से-कम पर्यावरण के लिए एक ग्रीन गुड डीड (हरित शुभ कार्य) करे। उनकी उपलब्धियों की सूची लंबी है और उन्हें देश-विदेशों से असंख्य सम्मान मिले हैं, जिसका यहां विस्तार से जिक्र कर पाना मुमकिन नहीं है। ( अधिक जानकारी के लिए विस्तृत विवरण देखें।)

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. हर्ष वर्धन की पुस्तक 'दो बूंदों की कहानी' के विमोचन के मौके पर उन्हें 'स्वास्थ्य वर्धन' कह कर अलंकृत किया था। वहीं प्रधानमंत्री श्री इंद्रकुमार गुजराल का कहना था- "भारत में यदि किसी एक मंत्री को मुझे असाधारण उपलब्धियों के लिए चुनना हो तो मेरी पहली पसंद डॉ. हर्ष वर्धन होंगे।"